
Namkum Land Dispute: राजधानी रांची के नामकुम अंचल स्थित बहुचर्चित 5.13 एकड़ जमीन के दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन को लेकर चल रहे लंबे कानूनी विवाद में झारखंड हाई कोर्ट से बड़ा फैसला सामने आया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पूर्व में एकल पीठ द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने रॉबर्ट एंथनी बारला की ओर से दाखिल LPA यानी लेटर्स पेटेंट अपील को स्वीकार करते हुए राजस्व अधिकारियों के पूर्व आदेशों को बड़ी राहत दी है, जबकि दूसरे पक्ष को सिविल कोर्ट में लंबित मुकदमे के जरिए अपनी बात रखने को कहा है।

80 साल पुराना है जमीन का इतिहास
यह पूरा कानूनी विवाद रांची जिले के हटिया थाना अंतर्गत मौजा गुंडू स्थित खाता संख्या 16 की जमीन से जुड़ा हुआ है। इस जमीन का इतिहास वर्ष 1944 से शुरू होता है, जब विरोनिका तिर्की ने रजिस्टर्ड सेल डीड के जरिए कुल 26.53 एकड़ जमीन खरीदी थी। इसमें से 8.80 एकड़ जमीन उन्होंने सामाजिक कार्यों के लिए रोमन कैथोलिक मिशन को दान कर दी थी। वर्ष 1983 में विरोनिका तिर्की के निधन के बाद उनके चार पुत्रों ने बची हुई 17.73 एकड़ जमीन का आपस में पारिवारिक बंटवारा कर लिया। इसी पारिवारिक समझौते के तहत 5.13 एकड़ जमीन जॉन फ्रांसिस कुजूर के हिस्से में आई थी।

पारिवारिक बंटवारे से उत्तराधिकार म्यूटेशन तक
जॉन फ्रांसिस कुजूर के इंतकाल के बाद वर्ष 1992 में इस जमीन का सक्सेशन म्यूटेशन नियमानुसार उनकी धर्मपत्नी डॉ. लुइसा बारला कुजूर के नाम दर्ज हुआ। हालांकि, परिवार के अन्य भाइयों ने इस जमाबंदी को रद्द कराने के लिए कानूनी दरवाजा खटखटाया, लेकिन लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2007 में उनकी याचिका खारिज हो गई। विवाद का नया दौर तब शुरू हुआ जब डॉ. लुइसा बारला कुजूर का भी निधन हो गया और उनके कथित दत्तक पुत्र रॉबर्ट एंथनी बारला ने उत्तराधिकार के आधार पर म्यूटेशन का आवेदन दिया।
नामकुम CO के आदेश को खंडपीठ ने दी मजबूती
दस्तावेजों की जांच के बाद नामकुम CO ने 16 जनवरी 2017 को रॉबर्ट एंथनी बारला के पक्ष में म्यूटेशन का आदेश पारित कर दिया था। इसके खिलाफ दायर अपील और रिवीजन याचिकाएं भी उच्च राजस्व अधिकारियों द्वारा खारिज कर दी गई थीं। इसके बाद निजी प्रतिवादियों ने हाई कोर्ट की एकल पीठ में रिट याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ ने 15 अक्तूबर 2025 को राजस्व अधिकारियों के फैसलों को रद्द कर दिया था।
टाइटल सूट में तय होगा असली हक
एकल पीठ के इसी फैसले को चुनौती देते हुए रॉबर्ट एंथनी बारला ने खंडपीठ के समक्ष LPA दायर की थी। खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एकल पीठ के फैसले को पूरी तरह निरस्त कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि जमीन के मालिकाना हक को लेकर पहले से जो टाइटल सूट सिविल कोर्ट में विचाराधीन है, निजी प्रतिवादी वहां जाकर अपना दावा मजबूती से रख सकते हैं। हाई कोर्ट के इस फैसले से राजस्व अधिकारियों द्वारा किए गए म्यूटेशन को फिलहाल बड़ी कानूनी ढाल मिल गई है।


