
नवादा: आज के दौर में जहां शादियों में महंगी गाड़ियों और भव्य सजावट पर खूब खर्च किया जाता है, वहीं बिहार के नवादा में एक दूल्हे ने अपनी शादी को सादगी और परंपरा से जोड़कर खास बना दिया। रोह प्रखंड के मरुई गांव निवासी एहतेशाम रजा अपनी दुल्हन जाकरा अकील को फूलों से सजी बैलगाड़ी पर बैठाकर घर लाए। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित इस अनोखी पहल को देखने के लिए गांव में लोगों की भीड़ जुट गई। दूल्हे ने इसके जरिए सादगी, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को अपनाने का संदेश दिया।

फूलों से सजी बैलगाड़ी पर गांव पहुंचा दूल्हा-दुल्हन
शुक्रवार की शाम पारंपरिक पगड़ी और सफेद शेरवानी पहने एहतेशाम रजा अपनी नई नवेली दुल्हन के साथ फूलों से सजी बैलगाड़ी पर मरुई गांव पहुंचे। जैसे ही बैलगाड़ी गांव की सीमा में दाखिल हुई, उन्हें देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।

हिंदू और मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों महिला, पुरुष और बच्चे बैलगाड़ी के पीछे-पीछे चलते हुए दूल्हे के घर तक पहुंचे। कई लोगों ने इस अनोखे पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। गांव में इस शादी और दूल्हा-दुल्हन के अनूठे अंदाज की चर्चा हो रही है।
शादी के कार्ड पर दूल्हा-दुल्हन की जगह लिखवाया ‘बापू और कस्तूरबा’
मरुई गांव के रहने वाले एहतेशाम रजा पेशे से निजी शिक्षक हैं। वे महात्मा गांधी के जीवन और विचारों से प्रभावित हैं। गांधीजी के प्रति अपना सम्मान जताने के लिए उन्होंने शादी के कार्ड पर दूल्हा-दुल्हन के नाम की जगह ‘बापू और कस्तूरबा’ लिखवाया।
इलाके में ‘ईआरबी सर’ के नाम से पहचाने जाने वाले एहतेशाम रजा ने अपनी शादी के जरिए गांधीजी के सादगीपूर्ण जीवन और आदर्शों को अपनाने की कोशिश की। उनके लिए बैलगाड़ी से दुल्हन को घर लाना केवल एक अनोखा फैसला नहीं, बल्कि अपने विचारों को व्यवहार में उतारने का तरीका भी था।
महंगी गाड़ियों के दिखावे से अलग चुना पारंपरिक रास्ता
एहतेशाम रजा ने बताया कि आजकल शादियों में दिखावे के लिए महंगी गाड़ियों और भव्य सजावट पर काफी खर्च किया जाता है। महात्मा गांधी के सादगी और शांति के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने दुल्हन को बैलगाड़ी से घर लाने का फैसला किया। उनका उद्देश्य शादी में अनावश्यक दिखावे को कम करने, पर्यावरण प्रदूषण से बचाव का संदेश देने और पारंपरिक ग्रामीण सवारी को फिर से पहचान दिलाने का है।
बैलगाड़ी चालक हरिराम यादव भी हुए भावुक
दुल्हन को बैलगाड़ी से गांव तक पहुंचाने वाले चालक हरिराम यादव नवादा जिले के मरुई पंचायत के मानपुर गांव के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि वे वर्षों से बैलगाड़ी चलाते आ रहे हैं, लेकिन इस मौके पर उन्हें जितना गर्व महसूस हुआ, वैसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ था।
इस पहल ने ग्रामीणों के बीच पारंपरिक जीवनशैली और सादगी के महत्व को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
16 अक्टूबर को हुई थी शादी
जानकारी के अनुसार, एहतेशाम रजा और जाकरा अकील की शादी 16 अक्टूबर को नवादा जिला मुख्यालय के मुस्लिम रोड में हुई थी। यह अरेंज मैरिज है। दुल्हन जाकरा अकील स्नातक पास हैं।
शादी के बाद दुल्हन को बैलगाड़ी से मरुई गांव लाने का फैसला लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। गांव के छोटे-छोटे बच्चे भी इस अनोखे नजारे को देखने पहुंचे।
सादगी और ग्रामीण संस्कृति को दिया नया संदेश
आज के समय में शादी समारोहों में महंगी गाड़ियों और भव्य सजावट का चलन बढ़ रहा है। ऐसे में एहतेशाम रजा और जाकरा अकील ने पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को अपनाकर अपनी शादी को चर्चा का विषय बना दिया।
उनकी इस पहल के जरिए सादगी, परंपरा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश सामने आया है। मरुई गांव में फूलों से सजी बैलगाड़ी पर दुल्हन की विदाई का यह नजारा लोगों के लिए एक यादगार


