
Koderma: कोडरमा के सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार पर नाबालिग से यौन उत्पीड़न और SC-ST एक्ट के तहत दर्ज केस में एक नया मोड़ सामने आ गया है। कोडरमा सदर अस्पताल की डॉक्टर फरहाना महफूज ने बताया है कि पीड़िता और उसके पेरेंट्स ने मेडिकल जांच कराने से साफ इनकार कर दिया है। रविवार को अरेस्ट होने के बाद से ही यह केस लगातार चर्चा में बना हुआ है, और अब मेडिकल टेस्ट से इनकार के बाद मामले में कानूनी पेच फंसता दिख रहा है।

तबीयत बिगड़ने पर हॉस्पिटल में कराया गया था एडमिट
नाबालिग की कंप्लेंट पर पुलिस ने त्वरित एक्शन लेते हुए सिविल सर्जन को अरेस्ट कर लिया था। इसके बाद सोमवार को जेल भेजे जाने के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें तुरंत सदर अस्पताल में एडमिट कराया गया। जहां एक तरफ आरोपी डॉक्टर का इलाज चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता की मेडिकल जांच को लेकर यह अहम अपडेट सामने आया है।

डॉक्टर फरहाना महफूज का बयान
सदर अस्पताल की डॉक्टर फरहाना महफूज ने साफ किया कि प्रोटोकॉल के तहत जब पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए लाया गया, तब नाबालिग और उसके परिवार वालों ने जांच कराने से मना कर दिया। हालांकि जानकारों का मानना है कि केवल मेडिकल टेस्ट से इनकार करने भर से केस खत्म नहीं हो जाता और न ही आरोप सही या गलत साबित होते हैं, लेकिन इससे केस की कानूनी दिशा पर असर जरूर पड़ सकता है।
अब पुलिस की जांच और सबूतों पर टिकी नजर
केस में FIR दर्ज होने और CWC के सामने बयान के बाद पुलिस अन्य कानूनी पहलुओं और टेक्निकल एविडेंस को खंगालने में जुटी है। मेडिकल टेस्ट न होने की स्थिति में अब पुलिस के लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाना और भी अहम हो गया है।


