
Gumla: गुमला जिले से साल 2018 से लापता एक 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची की बरामदगी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में विस्तृत शपथ पत्र दाखिल किया गया। सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि मामले की मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा का गुजरात के गांधीनगर स्थित फॉरेंसिक लैब में सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट कराया गया था, जिसमें उसके बयानों और भूमिका पर गहरा संदेह सामने आया है और वह संदिग्ध पाई गई है।


पांच तत्कालीन SP दे चुके थे कार्रवाई के निर्देश
सुनवाई के दौरान अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2018 से 2022 के बीच गुमला जिले में पदस्थापित रहे पांच तत्कालीन SP ने मामले की मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के लिए समय-समय पर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए थे। अदालत ने सरकार द्वारा दाखिल इस हलफनामे का संज्ञान लेते हुए प्रार्थी पक्ष को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है। अदालत ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है। मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर ने पैरवी की।
नार्को टेस्ट न होने पर कराए गए थे वैकल्पिक टेस्ट
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया था कि चिकित्सकीय और स्वास्थ्य कारणों के चलते मुख्य आरोपी का गुजरात के गांधीनगर में नार्को टेस्ट पूरा नहीं किया जा सका था। इसके विकल्प के तौर पर विशेषज्ञों ने वहां उसका सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट सहित दो अन्य पूरक वैज्ञानिक परीक्षण किए थे, जिसकी रिपोर्ट अब जांच का अहम हिस्सा बनी है।
मां ने दाखिल की है बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
गुमला से सितंबर 2018 में रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हुई पंद्रह वर्षीय बच्ची का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। अपनी लापता बेटी की सकुशल बरामदगी और न्याय की आस में उसकी बेबस मां चंद्रमुनि उराइन ने हाईकोर्ट में हेबियस कॉर्पस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। इसी याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट लगातार पुलिस और प्रशासनिक जांच की निगरानी कर रहा है।


