
New Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) के चुनाव नतीजों ने कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI को बहुत ही करारा झटका दिया है। केंद्रीय पैनल के चारों प्रमुख पदों में से NSUI का खाता तक नहीं खुल सका और पार्टी सीधे जीरो पर सिमट गई। इस चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने तीन सीटों पर कब्जा जमाया, तो वहीं एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मार ली। चुनाव के नतीजे आने के बाद अब NSUI के भीतर गलत टिकट बंटवारे को लेकर घमासान शुरू हो गया है और चुनाव प्रभारी कन्हैया कुमार की रणनीति पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

टिकट काटा तो निर्दलीय मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन, रिकॉर्ड वोटों से दर्ज की जीत
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा NSUI के बागी उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की हो रही है, जिन्होंने आधिकारिक उम्मीदवार को पटखनी देते हुए उपाध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक जीत हासिल की। दीपांशु ने पहले NSUI से ही टिकट मांगा था, लेकिन बाद में उनसे नाम वापस लेने को कह दिया गया। इसके बाद वे निर्दलीय ही मैदान में कूद पड़े और उन्हें 30,615 वोट मिले। यह आंकड़ा ABVP के इशु मौर्य को मिले 16,910 वोटों से लगभग दोगुना है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के बेटे और NSUI के अधिकृत उम्मीदवार वीर चतर सिर्फ 4,313 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर खिसक गए। कुछ ऐसा ही हाल संयुक्त सचिव पद पर भी दिखा, जहां टिकट न मिलने से नाराज विशेष यादव ने समाजवादी छात्र सभा के समर्थन से लड़कर 15,778 वोट बटोरे और दूसरे नंबर पर रहे, जबकि आधिकारिक प्रत्याशी पीछे छूट गए।

कन्हैया कुमार के खेमे का अपना तर्क, टिकट विवाद पर दी सफाई
NSUI के प्रभारी कन्हैया कुमार के करीबियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है कि किसी आपसी अहंकार की वजह से दीपांशु का टिकट काटा गया था। उनके समर्थकों का दावा है कि संगठन ने दीपांशु को अध्यक्ष पद से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था, लेकिन वे उपाध्यक्ष पद पर ही अड़े रहे। कन्हैया खेमे का आरोप है कि जाट समुदाय से आने वाले दीपांशु ABVP के अध्यक्ष उम्मीदवार के खिलाफ उतरने से हिचकिचा रहे थे। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब कन्हैया कुमार के कार्यकाल में बागी उम्मीदवार ने पार्टी का खेल बिगाड़ा हो। इससे पहले पंजाब यूनिवर्सिटी के 2024 चुनावों में भी टिकट न मिलने से नाराज बागी अनुराग दलाल ने निर्दलीय जीतकर अध्यक्ष पद पर कब्जा किया था और NSUI उम्मीदवार को महज 501 वोट मिले थे।


