
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू जिले के पंडवा प्रखंड में धान खरीद के बकाये भुगतान के मामले में 104 किसानों को बहुत बड़ी राहत दी है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की बेंच ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि जिन 104 किसानों पर धान खरीद में गड़बड़ी का कोई आरोप नहीं है, उनके बकाये पैसे दो महीने के भीतर हाईकोर्ट में जमा कराए जाएं। कोर्ट ने साफ कहा कि जब इन किसानों के पास धान देने की रसीद है और उन्हें आधी रकम पहले ही मिल चुकी है, तो बिना किसी ठोस वजह के उनका बाकी पैसा नहीं रोका जा सकता।

1.71 करोड़ रुपये का बकाया और पुराना आश्वासन
यह पूरा मामला पंडवा प्रखंड के पात्रा पैक्स (PACS) का है, जहां किसानों ने सरकार को धान बेचा था। किसानों को आधी रकम तो मिल गई थी, लेकिन बाकी 1.71 करोड़ रुपये लंबे समय से अटके पड़े थे। इससे पहले 10 जुलाई 2024 को भी हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आश्वासन पर बकाया चुकाने का आदेश दिया था। तब सरकार ने अगस्त 2024 के पहले हफ्ते तक पैसे देने का वादा किया था, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया।

जांच रिपोर्ट में 24 किसानों पर लगे आरोप, 104 किसान बेकसूर
बाद में सरकार ने कोर्ट में बताया कि पलामू डीसी की जांच में पात्रा पैक्स के जरिए धान खरीद में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। पैक्स के अध्यक्ष और अफसरों की मिलीभगत से कागजों पर ज्यादा धान खरीद दिखाई गई थी। हालांकि, जांच में सामने आया कि कुल 128 किसानों में से सिर्फ 24 किसानों पर ही गड़बड़ी के आरोप हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि केवल 24 किसानों पर लगे आरोपों के आधार पर बाकी 104 बेकसूर किसानों का पैसा रोकना बिल्कुल गलत है।
सीधे खातों में आएंगे पैसे, विभाग के सचिव जिम्मेदार तय
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि सरकार 104 किसानों के बकाये का पैसा दो महीने के अंदर कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करे। इसके बाद कोर्ट खुद सीधे किसानों के बैंक खातों में पैसे भेजेगा। वहीं बाकी 24 आरोपी किसानों के मामले में कोर्ट ने सरकार को जांच करने और दोषी पाए जाने पर ही कार्रवाई करने की छूट दी है। कोर्ट ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सचिव को इस आदेश का पालन कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया है और 7 दिसंबर 2026 तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। मामले की अगली समीक्षा 10 दिसंबर 2026 को होगी।


