
पटना: नवरात्र को लेकर पटना में तैयारियां अब जोर पकड़ने लगी हैं। शहर के प्रमुख पूजा स्थलों पर पंडाल बनाने का काम शुरू हो चुका है। कहीं कारीगर ढांचे को आकार दे रहे हैं तो कहीं देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पटना के डाकबंगला चौराहे पर भी इन दिनों दिन-रात काम चल रहा है।

यहां हर साल की तरह इस बार भी नवयुवक संघ श्री दुर्गा पूजा समिति ट्रस्ट की ओर से भव्य दुर्गा पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है। हालांकि, इस बार पंडाल की सजावट में कुछ अलग देखने को मिलेगा। समिति ने पंडाल को सजाने के लिए बंगाल से खास तरह के बड़े पत्ते मंगाए हैं।

बंगाल से आए पत्तों से सजेगा पंडाल
समिति के सचिव संजीव कुमार के मुताबिक, इस बार पंडाल की सजावट में बंगाल से मंगाए गए विशेष पत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन पत्तों को अलग-अलग आकार देकर पंडाल के डिजाइन में लगाया जा रहा है।
कारीगर पत्तों को काटने और उन्हें मनचाहा आकार देने के काम में जुटे हैं। इनका इस्तेमाल पंडाल के अलग-अलग हिस्सों में किया जा रहा है, जिससे सजावट को प्राकृतिक और अलग लुक देने की कोशिश की जा रही है।
दिन-रात पंडाल को अंतिम रूप देने में जुटे कारीगर
नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होनी है। ऐसे में पूजा समितियों के पास तैयारियों के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है। डाकबंगला चौराहे पर भी कारीगर लगातार काम कर रहे हैं।
पंडाल का ढांचा तैयार करने से लेकर सजावट तक का काम तेजी से चल रहा है। जैसे-जैसे नवरात्र नजदीक आ रहा है, पंडाल का रूप भी साफ नजर आने लगा है। हर साल डाकबंगला चौराहे का पूजा पंडाल शहर के लोगों के आकर्षण का केंद्र रहता है और इस बार भी समिति कुछ नया दिखाने की तैयारी में है।
हर साल कुछ नया करने की कोशिश
डाकबंगला चौराहे पर नवयुवक संघ श्री दुर्गा पूजा समिति ट्रस्ट की ओर से लंबे समय से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता रहा है। समिति हर साल पंडाल की थीम और सजावट में कुछ नया प्रयोग करने की कोशिश करती है।
इस बार बंगाल से मंगाए गए पत्तों को सजावट का हिस्सा बनाया गया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि तैयार होने के बाद यह पंडाल कैसा दिखाई देगा।
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए पंडाल परिसर में प्रवेश और निकासी की अलग-अलग व्यवस्था रखने की तैयारी भी की जा रही है। नवरात्र शुरू होने के साथ ही यहां बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन भी समिति के लिए अहम रहेगा।


