
Jamshedpur news: सरकारी दफ्तरों में आराम फरमाने और अपनी मर्जी से 11-12 बजे टहलते हुए पहुंचने वाले सरकारी बाबुओं के दिन अब शायद लदने वाले हैं। मंगलवार की सुबह जमशेदपुर से सटे पोटका प्रखंड सह अंचल कार्यालय में जो नजारा देखने को मिला, उसने पूरे प्रशासनिक अमले के पसीने छुड़ा दिए। जब दूर-दराज के गांवों से आए गरीब ग्रामीण अपने वोटर कार्ड और सरकारी कागजात दुरुस्त कराने के लिए सुबह से कतार में खड़े थे और कुर्सियों से अफसर गायब थे, तो पोटका विधायक संजीव सरदार ने किसी मीटिंग रूम में जाने के बजाय सीधे ब्लॉक के मेन गेट पर ही अपनी कुर्सी खिंचवा ली। विधायक करीब डेढ़ घंटे तक गेट पर पहरेदार बनकर बैठे रहे और 11 बजे के बाद आराम से दफ्तर पहुंच रहे लापरवाह अफसरों और कर्मचारियों का बाकायदा फूलों की माला पहनाकर ‘स्वागत’ किया। विधायक की इस अनोखी ‘गांधीगिरी’ ने लेटलतीफ बाबुओं को सरेआम पानी-पानी कर दिया।

10:10 पर खाली पड़ी थीं टेबलें, तो मेन गेट पर ही जमा लिया डेरा


मंगलवार की सुबह करीब 10:10 बजे विधायक संजीव सरदार बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक पोटका प्रखंड सह अंचल कार्यालय पहुंचे। उम्मीद थी कि 10 बजे सरकारी दफ्तर खुल चुका होगा और कामकाज चल रहा होगा। लेकिन अंदर घुसते ही नजारा बिल्कुल उलटा था—ज्यादातर कमरों में कुर्सियां खाली थीं, टेबल पर धूल उड़ रही थी और फाइलों के पास कोई नहीं था। यह देखकर विधायक का पारा चढ़ गया। वे अंदर जाकर अपने लिए चाय मंगाने के बजाय सीधे मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचे, वहां कुर्सी लगवाई और हाथ में डायरी-कलम लेकर खुद ही ‘हाजिरी’ लेने बैठ गए। वे करीब 11:30 बजे तक लगातार गेट पर डटे रहे और आने वाले हर कर्मचारी की घड़ी देखकर टाइम नोट करते रहे।
‘आइए हुजूर!’… देर से पहुंचे अफसरों को पहना दी फूलों की माला

घड़ी की सुइयां जैसे-जैसे 11 के पार जा रही थीं, साहब लोग अपने-अपने वाहनों से बड़े इत्मीनान से दफ्तर पहुंच रहे थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने मेन गेट पर विधायक को कुर्सी पर बैठा देखा, उनके होश उड़ गए। विधायक ने किसी से मारपीट या गाली-गलौज नहीं की, बल्कि एकदम फिल्मी और गांधीवादी अंदाज में आगे बढ़कर देर से पहुंचे श्रम पदाधिकारी धीरज कुमार, मनरेगा बीपीओ गुरुचरण महतो, क्लर्क अब्दुल रहमान, कार्तिक दास और लेडी सुपरवाइजर समेत कई कर्मियों को सरेआम माला पहना दी। माला पहनते ही कई कर्मचारियों के चेहरे शर्म से लाल हो गए और वे नजरें चुराने लगे। इसके बाद विधायक ने जमकर खरी-खोटी सुनाई और दो टूक कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से तनख्वाह लेते हैं, तो जनता का समय बर्बाद करने का हक किसने दिया?
वोटर लिस्ट का काम और ग्रामीणों की फजीहत, लगातार मिल रही थीं शिकायतें

विधायक ने बताया कि इन दिनों पूरे इलाके में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम चल रहा है। कोल्हान के दूर-दराज और बीहड़ गांवों से ग्रामीण अपना रोज का काम-धंधा और दिहाड़ी छोड़कर सुबह 8-9 बजे ही प्रखंड मुख्यालय पहुंच रहे हैं ताकि वोटर लिस्ट में अपना नाम या दस्तावेज सुधरवा सकें। लेकिन पिछले कई दिनों से शिकायतें आ रही थीं कि ब्लॉक में कोई सुनने वाला ही नहीं है, काम कछुए की चाल से चल रहा है और ग्रामीणों को पूरा-पूरा दिन भूखे-प्यासे लाइन में खड़ा रखा जाता है। इन्हीं शिकायतों की जमीनी हकीकत परखने के लिए यह औचक छापा मारा गया था, जहां शिकायतों का एक-एक शब्द सच साबित हुआ।
शो-कॉज का फरमान, ‘सुधर जाइए वरना नपेंगे’

विधायक संजीव सरदार ने साफ कर दिया कि सरकारी तंत्र में जनता को चक्कर कटवाने वाली यह सामंती कार्यशैली अब पोटका में नहीं चलेगी। उन्होंने मौके से ही जिले के वरीय अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी और देर से आने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को फौरन ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show-Cause) थमाने का निर्देश दिया। उन्होंने कर्मचारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा, “दूर-दराज के गांव से लोग बस का भाड़ा लगाकर ब्लॉक आते हैं, और आप लोग 11-12 बजे तक सोकर उठते हैं। जनता के काम में हीला-हवाली अब बर्दाश्त नहीं होगी। अपनी आदतें सुधार लीजिए, नहीं तो सीधे निलंबन की कार्रवाई के लिए तैयार रहिए।” इस हंगामे और गांधीगिरी के बाद पोटका प्रखंड कार्यालय में हड़कंप का माहौल है और बाकी दफ्तरों के कर्मचारी भी अब वक्त पर पहुंचने की फिक्र में जुट गए हैं।



