
Digital Desk Naxatra Samachar: जब कानून के रखवालों पर ही किसी बेकसूर नाबालिग को जबरन बालिग बनाकर जेल की सलाखों के पीछे धकेलने के आरोप लगें, तो व्यवस्था की साख पर सवाल उठना तय है। राजधानी रांची के डोरंडा थाने से जुड़ा यह मामला अब सीधे झारखंड हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंच चुका है, जहां कागजी हेरफेर और पुलिस की मनमानी की परतें खुल रही हैं। एक 17 साल के लड़के को पुलिस ने सरकारी फाइलों में 19 साल का नौजवान दिखाकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जब अदालत ने हकीकत परखने के लिए थाने की वीडियो रिकॉर्डिंग तलब की, तो जवाब मिला कि कैमरे खराब पड़े हैं। इस रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने रांची के एसएसपी को जिले के सभी थानों के कैमरे जांचने और डोरंडा थाने की व्यवस्था तुरंत दुरुस्त करने का सीधा हुक्म सुना दिया है।

कागजों पर 17 साल के लड़के को बना दिया 19 का बालिग
पूरे विवाद की शुरुआत डोरंडा थाने में एक नाबालिग को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने के बाद हुई। पीड़ित परिवार की ओर से दायर हेबियस कॉर्पस यानी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रार्थी के वकील सूरज किशोर प्रसाद ने अदालत को बताया कि लड़के का जन्म 21 अप्रैल 2009 को हुआ था। चार सितंबर 2026 को जब पुलिस ने उसे पकड़ा, तब उसकी उम्र महज सत्रह साल थी। परिजनों ने लड़के की उम्र साबित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड जैसे सभी जरूरी दस्तावेज पुलिस के सामने पेश किए थे। इसके बावजूद पुलिस ने परिजनों की दलीलों को नजरअंदाज करते हुए उसकी उम्र 19 साल दर्ज कर दी और आठ सितंबर को उसे बालिग बताकर न्यायिक रिमांड पर जेल भिजवा दिया।

जब कोर्ट ने फुटेज मांगी तो पुलिस ने कह दिया कैमरा खराब
पिछली सुनवाई के दौरान जब सरकारी दस्तावेज और मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी गई, तो उसमें भी लड़के की उम्र 19 साल ही लिखी मिली। इस पर अदालत ने कड़ा सवाल किया कि आखिर किस मेडिकल आधार पर उम्र का यह फैसला लिया गया। दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए हाईकोर्ट ने डोरंडा थाना प्रभारी को आदेश दिया था कि जिस वक्त बच्चे को हिरासत में लिया गया, उस समय का सीसीटीवी फुटेज कोर्ट में पेश किया जाए। सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि थाने के कैमरे खराब थे। पुलिस की इस दलील पर अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए रांची के एसएसपी को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि पूरे जिले के थानों में लगे कैमरे ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं।
दस्तावेजों में तारीखों की ओवरराइटिंग पर हाईकोर्ट सख्त
हाईकोर्ट की नजर जब केस से जुड़े सरकारी कागजों पर पड़ी, तो वहां तारीखों पर ओवरराइटिंग यानी काट छांट साफ दिखाई दी। कानूनी दस्तावेजों में इस तरह की बाजीगरी देखकर जजों ने गहरी नाराजगी जताई और इसे एक गंभीर मामला माना। अदालत ने साफ किया कि नाबालिग के अधिकारों के साथ इस तरह का खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। पूरे मामले की तह तक जाने के लिए हाईकोर्ट ने रांची के न्यायायुक्त से तुरंत जांच रिपोर्ट तलब की है, जिसके बाद अब पुलिस महकमे में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।


