
Ranchi: राजधानी रांची के पॉश इलाके अशोक नगर रोड नंबर-1 में आम रास्ते को लेकर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी व रेल DIG आलोक प्रियदर्शी और पत्रकार सैय्यद शारिफ इब्राहिम के बीच छिड़ा विवाद अब राज्य के शीर्ष प्रशासनिक तंत्र के केंद्र में आ गया है। स्थानीय थाना, अनुमंडल दंडाधिकारी की अदालत, मुख्यमंत्री सचिवालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय तक शिकायत पहुंचने के बाद अब इस पूरे मामले में झारखंड सरकार के गृह विभाग ने भी संज्ञान लिया है। पीड़ित पत्रकार ने राज्य की गृह सचिव वंदना दादेल से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम और दस्तावेजों की जानकारी दी। गृह सचिव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और नियमानुसार आगे की ठोस कार्रवाई करने का स्पष्ट भरोसा दिलाया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि इस मामले में जो भी कानूनी रूप से संभव होगा, वह आवश्यक कार्रवाई निश्चित तौर पर की जाएगी।

गृह सचिव की चौखट पर पहुंचे पत्रकार, दादेल ने लिया गंभीर संज्ञान
पत्रकार सैय्यद शारिफ इब्राहिम ने गृह सचिव वंदना दादेल से मुलाकात के दौरान आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी द्वारा अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर आम नागरिकों के बुनियादी आवागमन के अधिकार को छीना जा रहा है। उन्होंने सरकारी गाड़ी लगाकर रास्ता बाधित करने, अंगरक्षकों के साथ धमकाने और देर रात गेट के सामने ईंट-पत्थर डंप कराने से जुड़े तमाम दस्तावेज और घटनाक्रम से गृह सचिव को अवगत कराया। मामले की नजाकत और खाकी पर लगे गंभीर आरोपों को सुनते हुए गृह सचिव ने पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से लिया और आश्वस्त किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और नियमों के तहत जो भी उचित कदम होगा, वह उठाया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय तक गूंज, Service Rules के तहत कार्रवाई की मांग
राज्य स्तर पर गृह सचिव से मुलाकात से पहले यह मामला केंद्रीय गृह मंत्रालय (भारत सरकार) तक भी पहुंच चुका है। केंद्र सरकार को भेजे गए पत्र में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वरिष्ठ IPS अधिकारी का यह आचरण ऑल इंडिया सर्विस कंडक्ट रूल्स के सर्वथा प्रतिकूल है। इसे ‘प्रोफेशनल मिसकंडक्ट’ करार देते हुए ऑल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 के तहत उच्चस्तरीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत में 28 सितंबर की शाम सरकारी स्कॉर्पियो (JH01CC 2556) से मुख्य गेट का रास्ता रोकने, अंगरक्षकों की एके-47 राइफल से डराने, झूठे मुकदमों में जेल भेजने की कथित धमकी देने और अमर्यादित टिप्पणियां करने के गंभीर आरोप दर्ज हैं।
अदालती आदेश की अवहेलना और रात के अंधेरे में फिर…
यह विवाद उस वक्त और ज्यादा गर्मा गया जब एसडीएम सदर रांची के न्यायालय (वाद संख्या M-2842/2026) से विवादित स्थल पर शांति व्यवस्था बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद कथित तौर पर देर रात गेट के सामने भारी पत्थर के बोल्डर और ईंटें गिरा दी गईं। इससे परिवार का बाहर निकलना पूरी तरह बंद हो गया। इस बाबत अरगोड़ा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 (सरकारी/न्यायिक आदेश की अवहेलना) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और अवरोध हटवाने की मांग की गई है।
50 साल पुराना रास्ता और 6 परिवारों के हक की लड़ाई
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनका परिवार 1963 से इस जमीन पर रह रहा है और वर्ष 1991 में आरआरडीए (RRDA) से स्वीकृत नक्शे में भी 40 फीट चौड़ी सड़क से उनके मकान तक 12 फीट का वैध पहुंच मार्ग दर्ज है। यह मार्ग केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि यहां रहने वाले छह परिवारों के आने-जाने का एकमात्र जरिया है, जिसे इंडियन ईजमेंट्स एक्ट, 1882 का संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले रेल डीआईजी इस रास्ते को अपने निजी परिसर में मिलाने की कोशिश कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के इस कथित आचरण को लेकर खासी नाराजगी देखी जा रही है। बहरहाल, अब जबकि राज्य की गृह सचिव वंदना दादेल ने इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करते हुए उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है।


