
Ranchi; रांची के व्यवहार न्यायालय स्थित मध्यस्थता केंद्र से रिश्तों को जोड़ने वाली एक बेहद सुखद और सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। पिछले करीब दो साल से एक-दूसरे के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे पति-पत्नी का पारिवारिक विवाद गुरुवार को पूरी तरह सुलझ गया। गुजारा भत्ता (भरण-पोषण) के लिए अदालत की चौखट पर पहुंची ज्योति टोप्पो और उनके पति प्रवीण केरकेट्टा ने अपने सारे पुराने गिले-शिकवे, मतभेद और कड़वाहट भुलाकर एक बार फिर से साथ रहने का फैसला किया है।

फैमिली कोर्ट से मध्यस्थता केंद्र भेजा गया था विवाद
यह पूरा पारिवारिक विवाद फैमिली कोर्ट-1 के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश रमेश चंद्रा की अदालत में चल रहा था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के रिश्ते को एक और मौका देने के उद्देश्य से इस विवाद को सुलह के लिए मध्यस्थता केंद्र (मीडिएशन सेंटर) भेजने का निर्देश दिया था। अदालत की इस पहल के बाद प्रशिक्षित मध्यस्थ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार ओझा और दोनों पक्षों के वकीलों ने मामले को सुलझाने की दिशा में सकारात्मक प्रयास शुरू किए।

तीन-चार बैठकों में पिघली दिलों की बर्फ
मध्यस्थ अधिवक्ता और कानूनी सलाहकारों की सूझबूझ से महज तीन से चार बैठकों में ही दोनों पक्षों के बीच जमी बर्फ पिघलने लगी। बातचीत के दौरान पति-पत्नी को एक-दूसरे की भावनाएं समझने का मौका मिला। दोनों ने खुलकर अपनी बात रखी और अंत में पुराने विवादों और गलतफहमियों को पूरी तरह भुलाकर प्रेमपूर्वक वैवाहिक जीवन बिताने पर अपनी औपचारिक सहमति दे दी। दोनों ने यह भी तय किया कि वे न सिर्फ एक-दूसरे का बल्कि परिवार के सभी सदस्यों का पूरा मान-सम्मान करेंगे।
एक-दूसरे का ख्याल रखने का लिया संकल्प
सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के दौरान पति प्रवीण केरकेट्टा ने वादा किया कि वह पत्नी ज्योति की हर छोटी-बड़ी जरूरत और सम्मान का पूरा ख्याल रखेंगे। वहीं ज्योति टोप्पो ने भी पति का पूरा आदर करने और परिवार की खुशहाली के लिए समर्पित रहने की बात स्वीकार की।
डालसा सचिव ने बुके देकर दी नई शुरुआत की बधाई
सुलह की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के सचिव राकेश रौशन ने दोनों पति-पत्नी को फूल का गुलदस्ता भेंट किया। उन्होंने दोनों को नए सिरे से दांपत्य जीवन की शुरुआत करने के लिए बधाई दी और उनके सुखद व उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं व्यक्त कीं। इस सुलह से यह संदेश भी गया कि आपसी बातचीत और मध्यस्थता से बड़े से बड़े पारिवारिक विवादों का सुखद अंत संभव है।


