
Ranchi : राजधानी रांची की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने अरगोड़ा थाना क्षेत्र के रहने वाले 50 वर्षीय अभियुक्त मो. मुस्तफा अंसारी को दोषी ठहराते हुए 10 साल के सश्रम कारावास (सख्त जेल) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर 25 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

जुर्माने की राशि से होगा पीड़िता का इलाज और पुनर्वास
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोपी पर लगाए गए 25 हजार रुपये के जुर्माने की पूरी राशि पीड़ित बच्ची के चिकित्सीय खर्च और उसके भविष्य के पुनर्वास के लिए दी जाएगी। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(N) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 व 8 के तहत दोषी पाया था, जिसके बाद 23 सितंबर को उसे दोषी करार दिया गया था।

डीएनए (DNA) रिपोर्ट बनी फैसले का मुख्य आधार
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (SFSL) की जांच रिपोर्ट को सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य (सबूत) माना। जांच के दौरान पीड़िता के कपड़ों से लिए गए नमूनों में मिले पुरुष DNA प्रोफाइल का मिलान जब आरोपी मुस्तफा अंसारी के खून के नमूने से कराया गया, तो दोनों का मिलान पूरी तरह से सही पाया गया। इस वैज्ञानिक सबूत ने अदालत में केस को काफी मजबूत बना दिया।
2020 में दर्ज हुआ था मामला, जांच में सामने आया असली आरोपी
इस मामले को लेकर 2 जून 2020 को बरियातू थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई थी। शुरुआत में पीड़िता के पिता ने किसी अन्य व्यक्ति पर संदेह जताते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, पुलिस की विस्तृत जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर असली आरोपी मुस्तफा अंसारी की संलिप्तता उजागर हुई, जिसके बाद उसके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी।


