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RJD में रोहिणी आचार्य की वापसी की चर्चा तेज, क्या राबड़ी देवी छोड़ेंगी अपना पद?

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पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में रोहिणी आचार्य की सक्रिय राजनीति में वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने पार्टी में अपनी जगह रोहिणी आचार्य को अहम जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा है। बताया जा रहा है कि राबड़ी देवी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद छोड़कर यह जिम्मेदारी अपनी बेटी को सौंपने के पक्ष में हैं। हालांकि, इस संबंध में पार्टी की ओर से अब तक किसी औपचारिक फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।

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इस संभावित बदलाव को लेकर सबकी नजरें राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी यादव के रुख पर टिकी हैं। पार्टी के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से रोहिणी के संपर्क बढ़ाने की चर्चाओं ने भी उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं।

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रोहिणी को बड़ी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव?

सूत्रों के मुताबिक, राबड़ी देवी ने परिवार के भीतर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का पद छोड़कर रोहिणी आचार्य को यह जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा है। इस मुद्दे पर लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच चर्चा होने की बात कही जा रही है।

हालांकि, तेजस्वी यादव की सहमति और पार्टी के आधिकारिक निर्णय को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए रोहिणी को नई जिम्मेदारी मिलने की खबर को फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है।

सारण चुनाव में मिली थी हार, अब फिर चर्चा में रोहिणी

रोहिणी आचार्य ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण सीट से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद परिवार में मतभेद की खबरों के बीच उनके सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की चर्चा हुई थी।

अब सिंगापुर से लौटने के बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर फिर से चर्चाएं शुरू हो गई हैं। उनके मामा साधु यादव से मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। साधु यादव दावा कर चुके हैं कि रोहिणी छपरा से लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। हालांकि, इस दावे से उनकी उम्मीदवारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती है।

पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने की चर्चा

राजद के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से रोहिणी आचार्य के संपर्क बढ़ाने की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। पार्टी के भीतर कुछ लोगों का मानना है कि यदि उन्हें संगठन में अहम भूमिका मिलती है, तो पुराने समर्थकों को दोबारा सक्रिय करने की कोशिशों को गति मिल सकती है।

दूसरी ओर, संभावित संगठनात्मक बदलाव से पार्टी के भीतर अलग-अलग राजनीतिक समीकरण बनने की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं। हालांकि, राजद में किसी नई गुटबाजी या औपचारिक बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है।

चुनाव प्रचार और संगठन में क्या हो सकती है भूमिका?

रोहिणी आचार्य की संभावित वापसी को लेकर यह भी चर्चा है कि उन्हें जिम्मेदारी मिलने पर वह चुनाव प्रचार, सार्वजनिक मुद्दों और पुराने कार्यकर्ताओं को जोड़ने में भूमिका निभा सकती हैं। इससे पहले भी वह सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रियाओं और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा में रही हैं।

पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने के बाद रोहिणी की पहचान परिवार के प्रति समर्पण के उदाहरण के रूप में भी बनी। हालांकि, उनकी भावी राजनीतिक भूमिका और संगठन में संभावित जिम्मेदारी को लेकर अभी किसी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

फिलहाल, राजद में रोहिणी आचार्य की वापसी और राबड़ी देवी के पद छोड़ने के प्रस्ताव से जुड़ी चर्चाओं पर सबकी नजरें टिकी हैं। अब देखना होगा कि लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव इस संभावित बदलाव पर क्या रुख अपनाते हैं और पार्टी की ओर से कोई औपचारिक फैसला सामने आता है या नहीं।

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