
रोहतासगढ़ किले तक पहुंच को आसान बनाने वाला बहुप्रतीक्षित रोपवे प्रोजेक्ट एक बार फिर पटरी पर लौटने की तैयारी में है। करीब 13.65 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट पिछले साल ट्रायल के दौरान हादसे का शिकार हो गया था। अब तकनीकी खामियों की समीक्षा और डिजाइन में बदलाव के बाद इसे नई तकनीक के साथ दोबारा खड़ा करने की तैयारी है।

इसी सिलसिले में रोहतास के जिला पदाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने सोमवार को रोहतासगढ़ रोपवे निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण की प्रगति, तकनीकी पहलुओं और सुरक्षा मानकों की जानकारी ली। डीएम ने स्पष्ट कहा कि सभी जरूरी तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा जांच में पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही रोपवे को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।

26 दिसंबर 2025 को ट्रायल के दौरान हुआ था हादसा
रोहतास नगर पंचायत से कैमूर पहाड़ी पर स्थित रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम तक पहुंचने के लिए करीब 1,324 मीटर लंबा रोपवे बनाया जा रहा था। 26 दिसंबर 2025 को रोपवे का ट्रायल चल रहा था। इसी दौरान टावर नंबर 5 का पिलर लोड नहीं सह सका और अचानक गिर गया। हादसे में चार ट्रॉली केबिन और सपोर्टिंग पिलर जमीन पर आ गिरे।
गनीमत रही कि उस समय ट्रॉली में यात्री मौजूद नहीं थे। मौके पर काम कर रहे मजदूरों ने समय रहते भागकर अपनी जान बचाई। हादसे में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं थी। रोपवे को 1 जनवरी 2026 से नए साल के मौके पर पर्यटकों के लिए शुरू करने की योजना थी। लेकिन ट्रायल के दौरान हुए हादसे के बाद प्रोजेक्ट पर काम रोक दिया गया।
इंजीनियर सस्पेंड, कंपनी पर कार्रवाई की तैयारी
इस प्रोजेक्ट का निर्माण बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड यानी BRPNNL के माध्यम से कोलकाता की कंपनी Ropeway and Resources Private Limited से कराया जा रहा था।
हादसे के बाद सरकार ने प्रोजेक्ट से जुड़े इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया था। वहीं, संबंधित ठेकेदार कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। इसके बाद प्रोजेक्ट की तकनीकी खामियों और गुणवत्ता की विस्तृत समीक्षा कराई गई।
IIT पटना ने किया डिजाइन और क्वालिटी ऑडिट
हादसे के बाद BRPNNL की ओर से पूरे प्रोजेक्ट का IIT पटना से डिजाइन और क्वालिटी ऑडिट कराया गया। IIT की रिपोर्ट के आधार पर रोपवे के पिलरों के डिजाइन में बदलाव किए गए हैं।
डीएम दीपक कुमार मिश्रा के मुताबिक, IIT की रिपोर्ट मिलने के बाद बिहार राज्य पुल निर्माण निगम अब नई कंसल्टेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया में है। नई कंसल्टेंसी की ओर से तकनीकी दिशा-निर्देश मिलने के बाद रोपवे का निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।
सुरक्षा जांच के बाद ही पर्यटकों के लिए खुलेगा
रोपवे के दोबारा निर्माण के साथ इस बार सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है। प्रशासन के अनुसार, निर्माण पूरा होने के बाद जरूरी तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा जांच कराई जाएगी। इन परीक्षणों में रोपवे के सुरक्षित पाए जाने के बाद ही इसे आम पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।
रोहतासगढ़ किला और रोहितेश्वर धाम तक पहुंचने के लिए रोपवे बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसके संचालन से पहले सुरक्षा मानकों की पूरी तरह पुष्टि करना प्रशासन के लिए सबसे अहम चुनौती होगी।
पहाड़ी नदी के जलजमाव का भी लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान डीएम ने पहाड़ी नदी का भी जायजा लिया। ग्रामीणों ने शिकायत की कि नदी का पानी गांवों में प्रवेश कर जाता है। ग्रामीणों की समस्या सुनने के बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों को पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा।
(विकाश चंदन की रिपोर्ट)


