
New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को भगवान विश्वकर्मा जयंती के पावन पर्व पर पूरे देशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र के विकास और निर्माण कार्यों में दिन-रात जुटे देश भर के शिल्पकारों, कारीगरों और हुनरमंद श्रमजीवियों का विशेष अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि इन कर्मयोगियों का अद्वितीय कौशल और अथक परिश्रम ‘विकसित भारत’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को जमीन पर साकार करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

X पर साझा किया बधाई संदेश, शिल्पकारों की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में कहा कि देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा से जुड़े इस दिव्य व पावन अवसर पर वे निर्माण कार्यों में लगे सभी हुनरमंद साथियों का हृदय से वंदन करते हैं। उन्होंने कहा कि देश के हर कोने में बुनियादी ढांचे से लेकर रोजमर्रा के निर्माण तक, शिल्पकारों की साधना और दक्षता ही नए भारत की रीढ़ है। उनका परिश्रम देश की आर्थिक प्रगति और आत्मनिर्भरता की दिशा में सबसे बड़ा संबल है।

कारीगरों और श्रमजीवियों के प्रोत्साहन के लिए सरकार प्रतिबद्ध
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं को दोहराते हुए कहा कि राष्ट्र के नवनिर्माण में शिल्पकारों और कुशल कामगारों के प्रयासों को हर स्तर पर संबल और प्रोत्साहन मिलता रहे, इसके लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और कौशल विकास के माध्यम से श्रम साधकों के जीवन को और अधिक सशक्त व समृद्ध बनाने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
संस्कृत सुभाषित साझा कर किया भगवान विश्वकर्मा का वंदन
प्रधानमंत्री ने अपने शुभकामना संदेश के साथ देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की महिमा को समर्पित एक दिव्य संस्कृत श्लोक भी साझा किया:
“अनादिरप्रमेयश्च अरूपश्च जयाजयः।
लोकरूपो जगन्नाथः विश्वकर्मन्नमो नमः॥”
इस सुभाषित के भावार्थ को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान विश्वकर्मा आदि-अनादि, असीम और अप्रमेय हैं। उनका कोई एक निश्चित स्वरूप नहीं है और वे जय-पराजय के सभी बंधनों से परे हैं। वे इस संपूर्ण ब्रह्मांड और संसार के साक्षात स्वरूप तथा जगत के स्वामी के रूप में हर कण में विद्यमान हैं। प्रधानमंत्री ने समस्त सृष्टि के ऐसे महान शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा को कोटि-कोटि नमन किया।


