
पटना: बिहार के वित्त रहित विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए रविवार का दिन अहम रहा। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित अभिनंदन सह संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षाकर्मियों को संबोधित किया। इससे पहले सरकार की ओर से वित्त रहित और अनुदानित शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों-कर्मियों के भुगतान के लिए 461 करोड़ रुपये का सहायक अनुदान जारी किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त रहित शिक्षकों के लिए वेतनमान लागू करने की घोषणा को लेकर सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है और इस दिशा में शिक्षक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों से भी बातचीत की जाएगी।

‘वेतनमान जरूर लागू करूंगा’
सम्राट चौधरी ने शिक्षकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वेतनमान लागू करने की घोषणा पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक संघों, विधान परिषद सदस्यों और शिक्षकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आगे की व्यवस्था तय की जाएगी। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे इस मामले में किसी तरह की गलतफहमी में न रहें और सरकार उनकी मांग पर आगे काम करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वित्त रहित शिक्षकों को सम्मान देने का फैसला कई शिक्षक नेताओं और विधान परिषद सदस्यों के साथ हुई बातचीत के बाद संभव हुआ है।
‘अभी 461 करोड़ मिले, कुल 1700 करोड़ देने हैं’
मुख्यमंत्री ने वित्तीय सहायता का जिक्र करते हुए कहा कि अभी 461 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं और कुल करीब 1700 करोड़ रुपये दिए जाने हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल 400 करोड़ रुपये रिलीज किए गए हैं और आगे भी राशि जारी की जाएगी।
बता दें कि 19 सितंबर को सरकार की ओर से वित्त रहित विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के भुगतान के लिए 461 करोड़ रुपये के सहायक अनुदान की घोषणा की गई थी।
सम्राट चौधरी ने उन दावों पर भी प्रतिक्रिया दी, जिनमें बिहार सरकार के पास पर्याप्त पैसा नहीं होने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास पैसा नहीं होता तो राज्य में योजनाएं कैसे चल रही होतीं।
‘बिहार के बच्चों को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़े’
मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर भी कई घोषणाओं और योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बिहार के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़े।
उन्होंने कोटा में बड़ी संख्या में बिहार के छात्रों के पढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार राज्य में ही बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था तैयार करना चाहती है। इसके लिए हर प्रखंड में मॉडल स्कूल विकसित करने की बात कही गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मॉडल स्कूलों में लाइव क्लास की व्यवस्था शुरू की गई है और करीब 3.50 लाख बच्चे इन स्कूलों में पढ़ रहे हैं। उन्होंने 24 घंटे शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि बिहार में डिग्री कॉलेजों की संख्या आजादी के समय के मुकाबले बढ़ी है और सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने पर काम कर रही है।
‘बिहार में महिला यूनिवर्सिटी भी होगी’
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा। उन्होंने महिला शिक्षा को लेकर कहा कि राज्य में महिला विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना है, जहां छोटे से लेकर बड़े पदों पर महिलाएं कार्यरत होंगी।
उन्होंने कहा कि बिहार की पुरानी शिक्षा परंपरा में नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ शिक्षकों के सम्मान को भी आगे बढ़ाया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त रहित शिक्षकों के लिए अभी आधा काम हुआ है और सरकार की जिम्मेदारी बाकी है। उन्होंने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि वेतनमान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा और इस मुद्दे पर उनके प्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद किया जाएगा।


