
Jamshedpur: जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित कांग्रेस जिला कार्यालय के बाहर कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुए पथराव और बवाल के मामले में पुलिस ने कानूनी शिकंजा कस दिया है। दंडाधिकारी रजनीश कुमार मिश्रा की लिखित शिकायत के आधार पर बिष्टुपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले में निखिल तिवारी, मोहम्मद सेराज उर्फ झेलन राजू, शशांक शेखर और दीपू शर्मा को नामजद करने के साथ ही 50 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपियों पर बवाल काटने, पत्थरबाजी करने, पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की करने और सरकारी काम में रुकावट डालने के गंभीर आरोप लगे हैं।

बिना लिखित शिकायत के प्रशासन ने खुद लिया संज्ञान
हैरानी की बात यह रही कि 12 अक्टूबर को तिलक पुस्तकालय स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर हुए इस हिंसक टकराव के बाद दोनों ही राजनीतिक दलों की तरफ से पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई थी। दोनों पक्षों की चुप्पी के बावजूद जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ के इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और प्रशासनिक स्तर पर संज्ञान लेते हुए खुद मुकदमा दर्ज कराया। घटना के दिन हुए टकराव और पथराव में दोनों पक्षों के सात से अधिक लोग घायल हो गए थे।

वीडियो फुटेज से चिन्हित किए जा रहे उपद्रवी
पुलिस अब प्राथमिकी में नामजद आरोपियों के साथ-साथ भीड़ में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। मौके पर मौजूद लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो क्लिप और सोशल मीडिया पर वायरल डिजिटल साक्ष्यों को जांच का मुख्य आधार बनाया गया है। पुलिस अधिकारी वीडियो फुटेज खंगालकर यह पता लगा रहे हैं कि पथराव किसने शुरू किया, सरकारी जवानों से उलझने वाले कौन थे और बवाल में किसकी क्या भूमिका थी। साक्ष्यों की पुष्टि होते ही सभी चिन्हित उपद्रवियों के खिलाफ आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
JNU विवाद को लेकर भड़की थी चिंगारी
यह पूरा विवाद दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय यानी JNU से जुड़े एक मामले को लेकर शुरू हुआ था। भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करने कांग्रेस कार्यालय तिलक पुस्तकालय के बाहर पहुंची थीं। इसी दौरान दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए। पहले तीखी नारेबाजी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई और खूनी झड़प में बदल गई। दोनों तरफ से जमकर पत्थर चले, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी।


