
सुपौल: बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (BHSA) की ओर से चिकित्सकों की विभिन्न मांगों और लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर 22 सितंबर से ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का आह्वान किया गया है। संघ की ओर से जारी अपील में आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को जारी रखने की बात कही गई है।

इसी क्रम में सुपौल सदर अस्पताल में चिकित्सकों के धरना देने की बात कही गई थी। मंगलवार को हालांकि धरना स्थल पर अलग ही तस्वीर देखने को मिली। यहां चिकित्सकों के बैठने के लिए कुर्सियां तो लगाई गई थीं, लेकिन काफी देर तक कोई चिकित्सक धरना देने नहीं पहुंचा। मौके पर कुर्सियां खाली पड़ी रहीं।

धरना स्थल पर डॉक्टरों की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय
धरना स्थल पर चिकित्सकों की अनुपस्थिति को लेकर अस्पताल परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। वहीं, ओपीडी बहिष्कार को लेकर मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी रही। कई लोग यह जानने की कोशिश करते दिखे कि ओपीडी सेवा प्रभावित होगी या सामान्य रूप से मरीजों का इलाज जारी रहेगा। सदर अस्पताल में सामान्य दिनों में अलग-अलग विभागों की ओपीडी सेवाएं संचालित होती हैं और अस्पताल प्रशासन की ओर से डॉक्टरों की ड्यूटी रोस्टर जारी किया जाता रहा है।
मांगों के समर्थन में BHSA का ओपीडी बहिष्कार
BHSA ने चिकित्सकों की विभिन्न मांगों और लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ओपीडी बहिष्कार का आह्वान किया है। संघ की ओर से चिकित्सकों से एकजुट होकर संगठन के निर्णय के अनुरूप सहयोग करने की अपील की गई है।
हालांकि, सुपौल सदर अस्पताल में मंगलवार को प्रस्तावित धरना स्थल पर चिकित्सकों की मौजूदगी नहीं होने से आंदोलन की स्थानीय स्थिति को लेकर सवाल और चर्चाएं बनी रहीं।


