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नए Form 6 पर सुप्रीम कोर्ट का साफ जवाब, ‘ना मंजूरी दी, ना खारिज किया’, ECI के दावे पर उठे सवाल?

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Supreme Court: नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन वाले Form 6 में हुए बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अहम सुनवाई हुई। SC ने साफ कहा कि उसने नए Form 6 को ना मंजूरी दी है और ना ही खारिज किया है। यानी इस पर अभी कोई फैसला हुआ ही नहीं है और कोर्ट इस मामले की जांच करेगा।

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बेंच ने क्या कहा?

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह बात चुनाव आयोग (ECI) से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान कही। यह याचिका प्रिया मिश्रा ने दायर की है। कोर्ट ने इस पर नोटिस जारी करने को हामी भरी और इसे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर बाकी याचिकाओं के साथ 27 अक्टूबर को सुनवाई के लिए लिस्ट कर दिया।

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बिहार SIR वाले फैसले में नया Form 6 था ही नहीं

सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि CJI पिछले हफ्ते ही ECI के उस दावे को खारिज कर चुके हैं, जिसमें कहा गया था कि SC ने नए Form 6 को मंजूरी दी है। इस पर जस्टिस बागची ने साफ किया कि नए Form 6 पर कोर्ट ने अभी कोई फैसला नहीं दिया है। उनके मुताबिक बिहार में SIR से जुड़े मई 2026 के फैसले के वक्त नया Form 6 अस्तित्व में ही नहीं था, इसलिए उस फैसले को नए फॉर्म की मंजूरी या अस्वीकृति नहीं माना जा सकता। CJI सूर्यकांत ने वकीलों से यह भी कहा कि कोर्ट की टिप्पणियों के शब्द चुनकर उनके अलग मतलब न निकालें। बेंच ने साफ किया कि नए फॉर्म की वैधता पर आगे विचार होगा।

नए Form 6 में बदला क्या है?

नए घोषणा पत्र में वोटर के तौर पर रजिस्टर कराने वाले इंसान को बताना होता है कि वह या उसके पेरेंट्स पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान बनी वोटर लिस्ट में थे या नहीं। बाकी राज्यों के SIR में इस्तेमाल हुए पुराने Form 6 में यह जानकारी नहीं मांगी जाती थी।

विवाद शुरू कहां से हुआ?

यह मामला तब गरमाया जब खबरें आईं कि ECI के दो आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना बताया गया कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में केंद्र सरकार की तरफ से संशोधन किए बिना कानूनी फॉर्म में ऐसा बदलाव नहीं हो सकता। इसके बाद 26 सितंबर को ECI ने प्रेस रिलीज जारी कर दावा किया कि SC ने मई 2026 में बिहार SIR वाले फैसले में नए Form 6 का घोषणा पत्र बरकरार रखा था। अब SC ने साफ कर दिया है कि उस फैसले में नए फॉर्म पर विचार ही नहीं हुआ, क्योंकि वह फैसले के बाद लागू किया गया था।

ECI के कामकाज पर भी उठे सवाल

प्रिया मिश्रा और मध्य प्रदेश के पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा की याचिका में ECI के कामकाज और फैसले लेने के तरीके को चुनौती दी गई है। अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने करीब 10 महीने में लगभग 14 फैसले बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि तीन सदस्यों वाले आयोग को मिलकर चर्चा के बाद और तय प्रक्रिया से फैसले लेने चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ फैसले और आधिकारिक निर्देश दूसरे आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना जारी हुए।

याचिका में क्या मांगा गया है?

याचिकाकर्ताओं ने इन फैसलों, आदेशों, नोटिफिकेशन और निर्देशों को रद्द करने की मांग की है। साथ ही अनुच्छेद 324 और संबंधित कानूनों के तहत ECI को इन फैसलों पर दोबारा विचार करने का निर्देश देने की भी अपील की है। याचिका में आयोग के रिकॉर्ड, मीटिंग के मिनट्स, एजेंडा, वोटिंग का ब्योरा, असहमति वाले नोट और पत्राचार जैसे दस्तावेज पेश कराने की मांग भी शामिल है। फॉर्म 6 के बदलाव पर भी सवाल उठाते हुए उनका तर्क है कि वैधानिक फॉर्म में बदलाव तय कानूनी प्रक्रिया के बिना नहीं हो सकता।

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