
Supreme Court: झारखंड में DGP की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार ने जो नई नियमावली बनाई है, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इतना आगे बढ़ गया है कि अदालत ने साफ संकेत दिया है कि अगर सरकार की बनाई नियमावली रद्द होती है, तो उसके आधार पर हुई मौजूदा DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी रद्द करनी पड़ सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी न तो नियमावली रद्द की है और न ही DGP की नियुक्ति को लेकर कोई अंतिम फैसला सुनाया है। अदालत ने तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने का मौका देते हुए राज्य सरकार को उन्हें नोटिस पहुंचाने का निर्देश दिया है, जबकि इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।

दरअसल, झारखंड सरकार ने वर्ष 2025 में DGP के चयन और नियुक्ति से जुड़े नियमों में बदलाव किया था, जिसके तहत ऐसे पुलिस अधिकारी को भी DGP पद के लिए योग्य माना जा सकता है, जिसकी रिटायरमेंट में छह महीने से कम का समय बचा हो। इसके लिए कार्योत्तर सेवा का लाभ देने का प्रावधान किया गया है। इसी बदलाव को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार मामले में पुलिस प्रमुखों की नियुक्ति और कार्यकाल को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। अब अदालत ने पहली नजर में माना है कि झारखंड सरकार की नई नियमावली का यह प्रावधान उन दिशा-निर्देशों के खिलाफ जाता है।

नियमावली रद्द हुई तो मौजूदा DGP की नियुक्ति पर भी पड़ेगा असर
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर विवादित नियम को रद्द किया जाता है, तो उसके तहत हुई नियुक्ति को भी रद्द करना पड़ेगा। ऐसे में मौजूदा DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी सवाल खड़ा हो गया है, लेकिन कोई फैसला लेने से पहले अदालत ने उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है, ताकि उनकी बात सुने बिना नियुक्ति को लेकर आदेश पारित न हो।
अदालत ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि वह तदाशा मिश्रा तक नोटिस पहुंचाए, जिससे वह मामले की अगली सुनवाई में अपना पक्ष रख सकें। इसके साथ ही सरकार को यह विकल्प भी दिया गया है कि वह विवादित नियम पर दोबारा विचार करे या अदालत में जवाबी हलफनामा दाखिल कर बताए कि नियमावली में यह बदलाव किस आधार पर किया गया था।
UPSC भी करेगा सहयोग, 3 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र राजू रामचंद्रन से झारखंड सरकार की संशोधित नियमावली की वैधता की जांच करने का अनुरोध किया है। अदालत ने UPSC को भी निर्देश दिया है कि वह इस काम में न्याय मित्र का सहयोग करे, ताकि DGP चयन प्रक्रिया से जुड़े नियमों और सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों के बीच उठे सवालों पर स्थिति स्पष्ट हो सके।
झारखंड सरकार ने पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 46(2) और 46(3) के तहत वर्ष 2025 में महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक चयन एवं नियुक्ति नियमावली में बदलाव किया था। अब इस नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद राज्य सरकार के अगले कदम पर नजर रहेगी, क्योंकि सरकार के जवाब और नियमों की कानूनी जांच के आधार पर ही तय होगा कि मौजूदा व्यवस्था आगे जारी रहेगी या उसमें बदलाव करना पड़ेगा।


