
Police officer FIR: सुप्रीम कोर्ट ने देश में कानून और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े एक बेहद अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति यानी SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट 1989 के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने से पहले प्रशासनिक जांच होना अनिवार्य है। इस महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था को रेखांकित करते हुए शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु के एक पुलिस उपाधीक्षक (DSP) और एक सब इंस्पेक्टर के खिलाफ चल रही एफआईआर और पूरी कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।

बिना प्रशासनिक जांच के स्पेशल कोर्ट ने दे दिया था एफआईआर का आदेश
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की दो सदस्यीय पीठ ने जननिप्रिया और एक अन्य पुलिस अधिकारी की अपील पर यह फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने पाया कि इस पूरे मामले में स्पेशल कोर्ट ने SC/ST एक्ट की धारा 4 में दिए गए स्पष्ट नियमों को नजरअंदाज कर दिया था। बिना किसी अनिवार्य प्रशासनिक जांच के ही सीधे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी कर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कानून के तहत तय की गई प्राथमिक शर्त का पालन ही नहीं किया गया, तो फिर इस केस की कार्रवाई को आगे जारी रखने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है।

क्या था पूरा मामला और कैसे शुरू हुआ विवाद
पूरे विवाद की शुरुआत तमिलनाडु के त्रिची जिले से हुई थी। एक स्थानीय शिकायत के बाद जब सब इंस्पेक्टर ने शुरुआती छानबीन की, तो पाया कि मामला दो पक्षों के बीच केवल एक सिविल यानी आपसी विवाद था और बदले की भावना से आरोप लगाए गए थे। इसके बाद डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने भी जांच अधिकारी की इस रिपोर्ट को सही माना और एफआईआर दर्ज नहीं की। इससे नाराज होकर शिकायतकर्ता स्पेशल कोर्ट पहुंच गया और उसने पुलिस अफसरों पर ड्यूटी में लापरवाही का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करने की मांग कर दी। स्पेशल कोर्ट ने बिना किसी प्रशासनिक जांच के अफसरों पर एफआईआर का आदेश दे दिया, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने वापस मामला भेजने से भी किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे वापस स्पेशल कोर्ट भेजा जा सकता है ताकि प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट मंगवाई जा सके। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मांग को सिरे से ठुकरा दिया। अदालत ने कहा कि इस मोड़ पर प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट मंगाने के लिए मामला फिर से निचली अदालत में भेजने की कोई जरूरत नहीं है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पुथानाथम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी तमाम कार्यवाहियों को निरस्त करते हुए अफसरों को बड़ी राहत दे दी है।


