
New delhi/Deoghar: दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान विस्फोट करने और गुजरात के गांधीनगर स्थित सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी के मामले की जांच के तार झारखंड के देवघर से जुड़ गए हैं। 10 सितंबर को गांधीनगर थाने को एक E-Mail भेजकर यह सनसनीखेज धमकी दी गई थी। मामला सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और VVIP मूवमेंट से जुड़ा होने के कारण गुजरात पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड पर आ गईं और E-Mail के तकनीकी स्रोत व IP एड्रेस की ट्रैकिंग शुरू की गई।

ससुराल में छिपा था आरोपी, गुजरात साइबर सेल ने दबोचा
तकनीकी जांच और साइबर सेल से मिले इनपुट्स के आधार पर गुजरात पुलिस की टीम शुक्रवार को देवघर पहुंची। नगर थाना पुलिस के सहयोग से करनीबाग ठाढ़ी रोड स्थित बावनबीघा इलाके में एक घर में छापेमारी की गई। पुलिस ने मौके से गुलशन कुमार सिंह उर्फ गुलशन चौहान को गिरफ्तार कर लिया, जो उस समय अपनी ससुराल में रुका हुआ था। स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद गुजरात पुलिस की टीम आरोपी को आगे की पूछताछ के लिए अपने साथ गुजरात ले गई है।

रोशन की गिरफ्तारी के बाद ट्रेस हुई गुलशन की लोकेशन
देवघर SP प्रवीण पुष्कर ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि धमकी भरे ई-मेल में गुलशन की निजी ई-मेल ID का इस्तेमाल किया गया था। इस मामले में गुजरात पुलिस ने पहले बिहार के जमुई जिले के दादपुर निवासी रोशन को हिरासत में लिया था, जो देवघर में अपनी नानी के घर रह रहा था। रोशन से हुई कड़ी पूछताछ के बाद ही गुलशन का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल और डिजिटल लोकेशन ट्रेस कर बावनबीघा में दबिश दी। नगर थाने के अलग कमरे में हुई प्राथमिक पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि ई-मेल ID उसी की है।
सॉफ्टवेयर डेवलपर रहा है आरोपी, आईडी बेचे जाने का भी शक
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गुलशन मूल रूप से बिहार के जमुई जिले के दौलतपुर गांव का रहने वाला है और देवघर के नंदन पहाड़ इलाके में भी उसका मकान है। वह पहले एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में काम कर चुका है और वर्तमान में घर पर ही रह रहा था। जांच एजेंसी इस पहलू पर भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या उसकी ई-मेल आईडी किसी साइबर गिरोह को बेची गई थी। देवघर और जामताड़ा जैसे इलाकों में साइबर ठगों द्वारा जरूरतमंद लोगों से ई-मेल आईडी खरीदकर अपराध करने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। फिलहाल गुजरात पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस मामले के हर डिजिटल और जमीनी लिंक की गोपनीय जांच कर रही हैं।


