
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट को तीन नए और अनुभवी न्यायाधीश मिल गए हैं। हाईकोर्ट परिसर में आयोजित एक गरिमामय शपथ ग्रहण समारोह में चीफ जस्टिस ने मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन तीन नए न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने के साथ ही अब झारखंड हाईकोर्ट में कार्यरत जजों की कुल संख्या बढ़कर 16 हो गई है। न्यायिक सेवा और वकालत के लंबे अनुभव वाले इन तीनों जजों के आने से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।

देवघर की माटी से हाईकोर्ट बेंच तक जस्टिस मनोज प्रसाद
जस्टिस मनोज प्रसाद का जन्म वर्ष 1973 में देवघर में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा देवघर के सेंट फ्रांसिस स्कूल से पूरी हुई, जहां से उन्होंने वर्ष 1988 में ICSE बोर्ड से 10वीं पास की। वर्ष 1990 में पटना कॉलेज से इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री ली। इसके बाद वे कानून की पढ़ाई के लिए दिल्ली चले गए और वर्ष 1998 में DU के कैंपस लॉ सेंटर से LLB पूरा किया।

वर्ष 1999 में वे बिहार स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामांकित हुए और देवघर सिविल कोर्ट में दीवानी मामलों की वकालत शुरू की। 4 मई 2012 को वे झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस का हिस्सा बने और रांची में एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर के पद पर योगदान दिया। अब वे हाईकोर्ट के जज के तौर पर अपनी नई जिम्मेदारी निभाएंगे।
पटना और दिल्ली से कानून की बारीकियां सीखे जस्टिस अखिल कुमार
6 जनवरी 1972 को बिहार की राजधानी पटना में जन्मे जस्टिस अखिल कुमार की शुरुआती पढ़ाई उनके गृह नगर में ही हुई। 1986 में मैट्रिक और 1988 में पटना कॉलेज से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से ही समाजशास्त्र ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया। उच्च शिक्षा के दौरान उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर का रुख किया और वर्ष 1999 में LLB की डिग्री हासिल की।
उसी वर्ष बार काउंसिल में बतौर अधिवक्ता नामांकित होने के बाद उन्होंने कानून के दांव-पेंच सीखे। उन्होंने पटना हाईकोर्ट और पटना जिला अदालत में दीवानी और आपराधिक दोनों ही तरह के मामलों में लंबे समय तक प्रैक्टिस की और एक काबिल वकील के रूप में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
दिल्ली की अदालतों से झारखंड न्यायिक सेवा तक जस्टिस राम शर्मा का सफर
जस्टिस राम शर्मा का जन्म 7 जुलाई 1968 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने CBSE बोर्ड से 1984 में मैट्रिक और 1986 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। कानून के प्रति गहरी रुचि के कारण उन्होंने दिल्ली से ही वर्ष 1994 में विधि स्नातक यानी LLB की डिग्री पूरी की। पढ़ाई खत्म करते ही वर्ष 1994 में वे दिल्ली बार काउंसिल में वकील के तौर पर निबंधित हो गए।
जस्टिस शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट और दिल्ली की तमाम जिला अदालतों में सिविल और क्रिमिनल मामलों की वकालत करते हुए लंबा और समृद्ध अनुभव बटोरा। इसके बाद 26 मई 2012 को वे झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए। न्यायिक सेवा में विभिन्न पदों पर शानदार सेवाएं देने के बाद अब उन्होंने हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की है।


