
नेपाल की त्रिशूली नदी में आई भीषण तबाही के बाद लापता हुए पूर्वी चंपारण के सुगौली निवासी आनंद सहनी का 15 दिनों तक तलाश किए जाने के बावजूद कोई सुराग नहीं मिल सका (Trishuli River Missing)। नदी की तेज धार में बहने के बाद आनंद का शव बरामद नहीं हुआ। आखिरकार परिजनों ने उनका पुतला तैयार किया और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया।

जिस परिवार को उम्मीद थी कि शायद आनंद का शव मिल जाएगा और वे आखिरी बार उनका चेहरा देख सकेंगे, वह उम्मीद भी पूरी नहीं हो सकी। पुतले के अंतिम संस्कार के साथ परिवार ने भारी मन से आनंद को अंतिम विदाई दी।

नेपाल में रोजी-रोटी कमाने गए थे आनंद
आनंद सहनी सुगौली प्रखंड की दक्षिणी मनसिंघा पंचायत के मुसवा गांव के रहने वाले थे। परिवार के मुताबिक, वह रोजी-रोटी के सिलसिले में नेपाल गए थे। 26 अगस्त की सुबह उनकी पत्नी सविता देवी से फोन पर आखिरी बातचीत हुई थी।
इसके बाद परिवार को आनंद के त्रिशूली नदी में बह जाने की सूचना मिली। खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया। परिजन और ग्रामीण नेपाल पहुंचे और नदी किनारे समेत संभावित जगहों पर उनकी तलाश शुरू कर दी।
Trishuli River Missing: 15 दिन तक उम्मीद में रहा परिवार
एक दिन, दो दिन करते हुए 15 दिन बीत गए। परिवार की निगाहें हर उस जगह पर टिकी रहीं, जहां आनंद के मिलने की उम्मीद थी। लगातार तलाश के बावजूद न तो उनका शव मिला और न ही कोई दूसरा सुराग।
समय बीतने के साथ परिजनों की उम्मीद भी टूटती गई। आखिरकार शव के बिना ही अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया गया। परिजनों ने आनंद का पुतला तैयार किया और उसे प्रतीक मानकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की।
चार बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
परिजनों के मुताबिक, आनंद परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे। उनके पीछे तीन बेटे और एक बेटी हैं। सबसे बड़ा बेटा करीब 10 साल का बताया जा रहा है। पिता के लापता होने के बाद बच्चों के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है।
वहीं, आनंद के वृद्ध पिता भी पैरालिसिस से पीड़ित बताए जाते हैं। ऐसे में परिवार भावनात्मक दुख के साथ आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है। पत्नी और बच्चों के सामने घर का खर्च और बच्चों की परवरिश सबसे बड़ी चिंता बन गई है।
सरकार से आर्थिक मदद की गुहार
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब परिवार सरकार और प्रशासन से मदद की उम्मीद कर रहा है। परिजनों ने आनंद को आपदा पीड़ित परिवार मानते हुए नियमानुसार आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
पंचायत समिति सदस्य विनोद सहनी ने भी सरकार और प्रशासन से परिवार को जल्द से जल्द नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सरकारी मदद को जरूरी बताया।
नेपाल की त्रिशूली नदी में हुई इस त्रासदी के बाद पूर्वी चंपारण के आधा दर्जन से अधिक लोगों के प्रभावित या लापता होने की जानकारी सामने आई है। कई परिवार अब भी अपनों की सुरक्षित वापसी या उनके बारे में पुख्ता जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। आनंद सहनी के परिवार का 15 दिन का इंतजार अब पुतले के अंतिम संस्कार के साथ खत्म हुआ, लेकिन चार बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी का सवाल उनके सामने अब भी खड़ा है।


