
Naxatra Digital Desk: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में TSPC सुप्रीमो बृजेश गंझू के UP ATS के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद इस प्रतिबंधित संगठन को बड़ा झटका लगा है। बृजेश के खात्मे के बाद अब 10 लाख रुपये का इनामी शशिकांत गंझू संगठन का नया सुप्रीमो बन गया है। TSPC में बचे कमांडरों में शशिकांत को सबसे प्रमुख माना जा रहा है और अब संगठन को फिर से खड़ा करने की जिम्मेदारी उसी पर आ गई है।

50 से ज्यादा केस और 10 लाख का इनाम
पलामू जिले के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव का रहने वाला शशिकांत लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की हिट लिस्ट में है। झारखंड सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग के अलावा UP में भी उसके खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज हैं। वह NIA के मामलों में भी वांटेड है।

माओवादी से TSPC सुप्रीमो बनने का सफर
शशिकांत का उग्रवादी सफर साल 2000 के आसपास शुरू हुआ था। शुरुआत में वह माओवादी संगठन में सक्रिय था, लेकिन बाद में बृजेश गंझू के संपर्क में आकर TSPC में शामिल हो गया। पलामू और चतरा का इलाका उसकी गतिविधियों का मुख्य केंद्र रहा है। पुलिस के मुताबिक, वह हमेशा AK-47 जैसे आधुनिक हथियार के साथ रहता है।
13 मुठभेड़ों में बच निकला, पुलिस बल अलर्ट
साल 2010 के बाद से शशिकांत पुलिस के साथ करीब 13 मुठभेड़ों में बच निकलने में कामयाब रहा है। सितंबर 2025 में मनातू में हुई मुठभेड़ के दौरान वह भाग निकला था, जिसमें दो जवान शहीद हो गए थे। पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि वह काफी अंधविश्वासी है और बड़ी घटनाओं के बाद बलि देता रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी निगरानी
बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद अब झारखंड पुलिस, NIA और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की नजरें शशिकांत पर टिक गई हैं। एजेंसियों को आशंका है कि जेल से बाहर आए नथुनी सिंह जैसे साथियों की मदद से शशिकांत संगठन के बचे कैडर को दोबारा जुटा सकता है। फिलहाल एजेंसियां उसके ठिकाने और संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी हैं।


