
पटना: बिहार में समान नागरिक संहिता यानी UCC (Uniform Civil Code) को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के बयान के बाद बिहार में भी सहयोगी दलों के रुख को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। खासतौर पर NDA की सहयोगी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के रुख पर सबकी नजर है।

HAM के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने फिलहाल UCC पर सीधे समर्थन या विरोध से दूरी बनाई है। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने UCC को लेकर अगर कोई बात कही है तो निश्चित तौर पर कुछ सोचकर ही कही होगी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि HAM इस मुद्दे पर अकेले कोई फैसला नहीं लेगी।

UCC Bihar Politics: मांझी की पार्टी ने अभी नहीं खोले पत्ते
संतोष सुमन ने कहा कि UCC से जुड़ी कोई औपचारिक जानकारी फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं आई है। ऐसे में अभी इस पर अंतिम राय देना उचित नहीं होगा। अगर सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव आता है तो NDA के सभी घटक दलों के साथ चर्चा की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री के सामने भी पार्टी अपनी बात रखेगी। सभी पक्षों की राय सुनने के बाद ही HAM अपना रुख तय करेगी। यानी फिलहाल मांझी की पार्टी ने UCC पर अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। पार्टी ने न तो इसे खारिज किया है और न ही खुलकर समर्थन की घोषणा की है।
‘अमित शाह ने कुछ अच्छा सोचकर ही कहा होगा’
अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संतोष सुमन ने कहा कि गृह मंत्री ने निश्चित तौर पर कुछ सोचकर ही UCC लागू करने की बात कही होगी। उनके मुताबिक, इसमें कुछ अच्छी बातें जरूर होंगी।
हालांकि, संतोष सुमन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी प्रस्ताव को देखने के बाद ही उस पर अंतिम राय बनाई जा सकती है। इससे संकेत मिलता है कि HAM फिलहाल ‘पहले प्रस्ताव और चर्चा, फिर फैसला’ की रणनीति पर चल रही है।
JDU के विरोध पर क्या बोले संतोष सुमन?
UCC को लेकर JDU के विरोध और BJP के समर्थन के बीच NDA में मतभेद की संभावना पर भी संतोष सुमन से सवाल किया गया। उन्होंने NDA में किसी तरह के घमासान से इनकार किया।
उनका कहना था कि किसी एक व्यक्ति के बयान को पूरी पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं माना जा सकता। किसी पार्टी के अधिकृत नेतृत्व की ओर से आधिकारिक बयान आने पर ही उसे पार्टी की स्थिति के तौर पर देखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी घटक दल की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई रुख सामने आता है तो HAM भी उस पर अपनी प्रतिक्रिया देगी।
HAM के लिए आसान नहीं होगा फैसला
UCC का मुद्दा HAM के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। पार्टी NDA का हिस्सा है। ऐसे में केंद्र सरकार के किसी बड़े एजेंडे पर उसे अपने सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाकर आगे बढ़ना होगा।
यही वजह है कि संतोष सुमन ने तत्काल कोई राजनीतिक लाइन लेने के बजाय गठबंधन के भीतर चर्चा की बात कही है। पार्टी पहले प्रस्ताव और उसके प्रावधानों को देखना चाहेगी। इसके बाद NDA के दूसरे घटक दलों की राय पर भी विचार किया जाएगा।
क्यों अहम है मांझी की पार्टी का रुख?
बिहार में UCC को लेकर अलग-अलग सहयोगी दलों की राय सामने आने के बाद HAM की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। अगर भविष्य में बिहार में UCC लागू करने को लेकर कोई औपचारिक पहल होती है, तो NDA के भीतर सहयोगी दलों की राय राजनीतिक रूप से अहम होगी।
ऐसे में संतोष सुमन का यह कहना कि ‘अमित शाह ने कुछ अच्छा सोचकर ही कहा होगा’ राजनीतिक संकेत जरूर देता है। हालांकि, इसे HAM का आधिकारिक समर्थन नहीं माना जा सकता।
फिलहाल तस्वीर साफ है HAM ने UCC पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। संतोष सुमन के मुताबिक पहले प्रस्ताव आएगा, फिर NDA के घटक दलों के बीच चर्चा होगी और उसके बाद पार्टी अपना रुख तय करेगी। ऐसे में अब बिहार की सियासत में नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में मांझी की पार्टी UCC को लेकर आखिर किस लाइन पर जाती है।


