
Digital Desk: जब इरादे फौलादी हों और सीने में खाकी वर्दी पहनने की चाह धधक रही हो, तो कोई भी बंदिश या पहनावा रुकावट नहीं बन सकता। रामगढ़ के खेल मैदान से सामने आया नजारा इसी अदम्य साहस और लगन की मिसाल पेश कर रहा है। जिले में होने वाली होमगार्ड बहाली को लेकर पसीना बहा रहे युवाओं के बीच जब कई महिलाएं अपनी पारंपरिक वेशभूषा यानी साड़ी पहनकर ही 1600 मीटर दौड़ के ट्रायल में उतर गईं, तो देखने वाले दंग रह गए। घरेलू जिम्मेदारियों और चूल्हे-चौके के बीच से समय निकालकर मैदान तक पहुंचीं इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि वर्दी का सपना किसी खास स्पोर्ट्स किट का मोहताज नहीं होता, बल्कि इसके लिए पैरों में रफ्तार और दिल में अटूट हौसले की जरूरत होती है।

24 अक्टूबर से शुरू होगी 284 पदों पर बहाली, महिलाओं को मिला 50 फीसदी आरक्षण
रामगढ़ जिले में आगामी 24 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच होमगार्ड जवानों की बहाली प्रक्रिया आयोजित की जानी है। जिले में कुल 284 पदों पर चयन होना है, जिसको लेकर शहरी और ग्रामीण इलाकों के युवाओं में जबर्दस्त होड़ मची हुई है। इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि इसमें आधी आबादी यानी महिलाओं के लिए बड़ा अवसर दिया गया है। कुल सीटों में से 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इतना ही नहीं, सामाजिक रूप से संघर्ष झेल रहीं विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 5 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण का विशेष प्रावधान भी रखा गया है। सरकार के इस कदम ने गांव-देहात की महिलाओं को खाकी वर्दी पहनकर अपने पैरों पर खड़े होने की नई उम्मीद दी है।

डिफेंस एकेडमी का ट्रायल और साड़ी में 1600 मीटर की कड़ी परीक्षा
शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में खुद की तैयारी को परखने के लिए एक स्थानीय डिफेंस एकेडमी की ओर से 1600 मीटर दौड़ का ट्रायल आयोजित किया गया था। इस ट्रायल में युवाओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में युवतियों और महिलाओं ने हिस्सा लिया। मैदान में उस वक्त सब हैरान रह गए जब कई महिलाएं साड़ी का पल्लू कसकर कमर में बांधे सीधे स्टार्टिंग प्वाइंट पर आ खड़ी हुईं। सीटी बजते ही उन्होंने पूरे दमखम के साथ दौड़ना शुरू किया और तय दूरी को पूरी ऊर्जा के साथ पूरा किया। 1600 मीटर की दूरी तय करना शारीरिक रूप से बेहद थकाऊ और कठिन माना जाता है, लेकिन इन महिलाओं की सांसों की तेजी और कदमों की दृढ़ता ने दिखा दिया कि वे किसी भी चुनौती से पीछे हटने वाली नहीं हैं।
चूल्हा-चौका संभालकर मैदान में बहा रहीं पसीना, खाकी पहनने की ललक
ग्रामीण और कस्बाई परिवेश से आने वाली इन महिलाओं का यह सफर आसान नहीं रहा है। घर-परिवार की जिम्मेदारियां, बच्चों की परवरिश और सामाजिक बंधनों के बीच शारीरिक अभ्यास के लिए वक्त निकालना अपने आप में एक बड़ा संघर्ष है। कई महिलाओं के पास न तो दौड़ने के लिए ट्रैक सूट थे और न ही महंगे जूते, लेकिन उन्होंने परिधान को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। वे जैसी थीं, उसी रूप में मैदान में उतरीं और साबित किया कि वर्दी हासिल करने का जज्बा किसी दिखावे से कहीं ऊपर होता है।
रामगढ़ में 24 अक्टूबर से शुरू होने वाली यह बहाली प्रक्रिया सिर्फ 284 पदों की नौकरी भर नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं के स्वाभिमान की लड़ाई है जो समाज में अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनाना चाहती हैं। साड़ी पहनकर मैदान का चक्कर लगाने वाली इन महिलाओं की मेहनत की असली परीक्षा अब भर्ती के आधिकारिक ग्राउंड पर होगी, जहां उनका यह संघर्ष उन्हें खाकी के मुकाम तक पहुंचाने का काम करेगा।


