
Ramgarh: रामगढ़ स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ रजरप्पा मां छिन्नमस्तिका मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत के पहले के आदेश पर अमल न होने को लेकर संजीव कुमार सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सोमवार को अहम सुनवाई हुई। कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद रामगढ़ की डीसी और राज्य के पर्यटन विभाग के सचिव अदालत में खुद हाजिर हुए।

13 अक्टूबर तक शपथ पत्र देने का आदेश

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की बेंच में हुई। अदालत ने पर्यटन सचिव को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई से पहले एक शपथ पत्र जमा करें। इसमें उन्हें साफ तौर पर यह बताना होगा कि रजरप्पा मंदिर के विकास के लिए तैयार किए गए 102 करोड़ रुपये के प्लान (DPR) पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और इसके लिए पैसे का इंतजाम किस फंड से किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को तय की गई है। कोर्ट ने दोनों बड़े अफसरों को अगली तारीख पर खुद आने से छूट देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ने की इजाजत दी है।
पर्यटन सचिव बोले- बजट बड़ा है, मंत्री के पास भेजी गई है फाइल
सुनवाई के दौरान पर्यटन सचिव ने अदालत को बताया कि रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए बजट काफी बड़ा है। इसलिए योजना से जुड़ी फाइल विभागीय मंत्री की मंजूरी के लिए भेजी गई है। वहीं, प्रार्थी की ओर से पैरवी कर रहे वकील भरत कुमार ने कोर्ट को बताया कि अदालत के पुराने आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर काम में बहुत देरी हो रही है।
भैरवी नदी तट पर सुरक्षा का बड़ा मुद्दा
हाईकोर्ट ने पहले की एक सुनवाई में बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा था कि साल 2023 में ही मंदिर परिसर को संवारने का स्पष्ट आदेश दिया गया था। अदालत ने चिंता जताई थी कि मंदिर के पास बहने वाली भैरवी नदी के किनारे पुख्ता सुरक्षा इंतजाम न होने की वजह से कई श्रद्धालुओं की जान जा रही है। ऐसे में कोर्ट के आदेश को जमीन पर उतारना बहुत जरूरी है ताकि बाहर से आने वाले भक्तों और सैलानियों को बेहतर व सुरक्षित सुविधाएं मिल सकें।
2023 के आदेश में दिए गए थे 10 जरूरी निर्देश
याचिकाकर्ता संजीव कुमार सिंह ने अपनी याचिका में बताया कि हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2023 को सरकार और प्रशासन को 10 अहम काम पूरे करने के आदेश दिए थे। इनमें मंदिर परिसर को सुंदर बनाना, पक्के स्नान घाट, महिलाओं के कपड़े बदलने के कमरे, साफ शौचालय, पीने का शुद्ध पानी, रोशनी के इंतजाम, प्राथमिक इलाज केंद्र, नदी का चौड़ीकरण और इलाके से अवैध कब्जे हटाना शामिल था। अब अदालत यह सुनिश्चित कर रही है कि इन सभी सुविधाओं का काम जल्द से जल्द शुरू हो सके।


