
भुवनेश्वर: ओडिशा के नंदनकानन चिड़ियाघर के क्वारंटाइन सेंटर में रखे गए पांच बेबी ओरंगुटान में से एक की तबीयत खराब हो गई है। उसे 13 सितंबर से तेज बुखार है। दवा देने के बाद बुखार कुछ समय के लिए कम हो जाता है, लेकिन फिर वापस आ रहा है। फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है और उसे सख्त मेडिकल निगरानी में रखा गया है।

बाकी चार बेबी ओरंगुटान पूरी तरह स्वस्थ हैं। वे सामान्य व्यवहार कर रहे हैं। एक ओरंगुटान के बीमार होने के बाद चिड़ियाघर प्रशासन इन विदेशी वन्यजीवों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है।

AC कमरे में रखे गए हैं सभी ओरंगुटान
क्वारंटाइन सेंटर में पांचों ओरंगुटान के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। उन्हें तापमान नियंत्रित AC कमरे में रखा गया है। कमरे में मच्छरों से बचाव के लिए विशेष मच्छरदानियां भी लगाई गई हैं। नए वातावरण में इन जानवरों को किसी तरह का तनाव न हो, इसका भी खास ध्यान रखा जा रहा है।
सॉफ्ट टॉयज और झूले से तनाव कम करने की कोशिश
ओरंगुटान के कमरे में सॉफ्ट टॉयज और झूले लगाए गए हैं। उन्हें हल्का संगीत भी सुनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें सहज रखना और नए वातावरण के कारण होने वाले तनाव को कम करना है।
पशु चिकित्सकों का मानना है कि ओरंगुटान प्राकृतिक रूप से वर्षावनों में रहने वाले जानवर हैं। ऐसे में नए वातावरण, थकान, तनाव या अचानक हुए बदलाव का असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। हालांकि, बीमार ओरंगुटान को बुखार क्यों हो रहा है, इसकी चिकित्सकीय जांच की जा रही है।
पैरासिटामोल आधारित दवा दी जा रही
वन्यजीव स्वास्थ्य विशेषज्ञ आदित्य आचार्य के अनुसार, बीमार ओरंगुटान को बुखार कम करने के लिए पैरासिटामोल आधारित दवा दी जा रही है। दवा देने के बाद उसका तापमान कम होता है, लेकिन कुछ समय बाद बुखार दोबारा आ जाता है। बीमार जानवर का खाना भी फिलहाल थोड़ा कम कर दिया गया है। उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
हर दो घंटे में दूध, फल और उबले आलू
पांचों बेबी ओरंगुटान के लिए विशेष डाइट चार्ट तैयार किया गया है। देखभाल करने वाले कर्मचारी उन्हें हर दो घंटे में दूध पिला रहे हैं। इसके अलावा उन्हें सेब और केले का रस तथा उबले हुए आलू भी दिए जा रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य नए वातावरण में उनकी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करना और स्वास्थ्य को स्थिर रखना है।
सरकार ने बनाई 5 सदस्यीय तकनीकी समिति
ओडिशा सरकार ने इन रेस्क्यू किए गए ओरंगुटान की उचित देखभाल और स्वास्थ्य निगरानी के लिए पांच सदस्यीय तकनीकी समिति का गठन किया है। समिति इन वन्यजीवों की स्थिति और उनके लिए की जा रही व्यवस्थाओं पर नजर रखेगी। बीमार ओरंगुटान की स्थिति को देखते हुए मेडिकल टीम भी लगातार निगरानी कर रही है।
8 सितंबर को जंगल से किए गए थे रेस्क्यू
बता दें कि पांचों बेबी ओरंगुटान को 8 सितंबर को बालासोर जिले के बिचित्रपुर जंगल से रेस्क्यू किया गया था। इसके बाद उन्हें नंदनकानन चिड़ियाघर के क्वारंटाइन सेंटर में लाया गया।
इन ओरंगुटान के जंगल में मिलने के बाद वन्यजीव तस्करी की आशंका भी सामने आई है। मामले की जांच ओडिशा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) कर रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये दुर्लभ विदेशी वन्यजीव बिचित्रपुर जंगल तक कैसे पहुंचे और इनके पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की भूमिका है या नहीं। फिलहाल चिड़ियाघर प्रशासन का पूरा ध्यान बीमार बेबी ओरंगुटान के स्वास्थ्य पर है। उसकी स्थिति स्थिर है, जबकि बाकी चार ओरंगुटान स्वस्थ बताए जा रहे हैं।


