
Koderma: कोडरमा जिले में तेजी से गिरते भूजल स्तर को स्थिर बनाए रखने और भविष्य के जल संकट से निपटने के लिए वर्षा जल संचयन की दिशा में सामूहिक प्रयासों की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। आम नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले में ‘कैच द रेन’ अभियान व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। इसी अभियान के बीच झुमरी तिलैया स्थित क्लोरोफिल स्कूल से जल प्रबंधन की एक ऐसी प्रेरणादायी तस्वीर सामने आई है, जिसने साबित कर दिया है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।

सूखे कुएं में जान फूंकने के लिए तैयार किया वाटर हार्वेस्टिंग मॉडल
क्लोरोफिल स्कूल के परिसर में स्थित कुआं जब पूरी तरह सूख गया, तो स्कूल के संचालक अजय अग्रवाल ने समस्या से भागने के बजाय उसका स्थायी समाधान निकाला। उन्होंने परिसर में वाटर हार्वेस्टिंग कम फिल्ट्रेशन का एक बेहद प्रभावी ढांचा तैयार किया। इस तकनीक के जरिए बारिश के पानी को फिल्टर करके सीधे सूखे कुएं में उतारा गया, जिससे न केवल कुएं में दोबारा भरपूर पानी आ गया, बल्कि आसपास का भूजल स्तर भी तेजी से सुधरा। इस सफल नवाचार को देखने और समझने के लिए अब दूसरे लोग भी स्कूल पहुंच रहे हैं।

सालाना 10 लाख लीटर पानी का संचयन, ग्रे और ब्लैक वाटर के लिए अलग सोख्ता
अजय अग्रवाल ने केवल वर्षा जल संचयन तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि स्कूल के शौचालय और रसोई से निकलने वाले दूषित और इस्तेमाल किए गए पानी (ग्रे और ब्लैक वाटर) के निस्तारण के लिए अलग-अलग सोख्ता गड्ढे तैयार किए। इस समग्र जल प्रबंधन प्रणाली के जरिए वे सालाना लगभग 10 लाख लीटर पानी का संचयन कर रहे हैं। इस तकनीक का असर यह है कि भीषण गर्मियों में भी स्कूल का कुआं साफ पानी से लबालब भरा रहता है और जगह-जगह बने सोख्ता गड्ढों से जमीन में नमी बने रहने के कारण पूरा स्कूल परिसर हमेशा हरा-भरा दिखता है।
नगर परिषद की टीम ने किया सम्मानित, होल्डिंग टैक्स में छूट का ऐलान
हाल ही में झुमरी तिलैया नगर परिषद की ‘कैच द रेन’ टीम ने स्कूल पहुंचकर इस पूरी प्रणाली का विस्तृत मुआयना किया और उत्कृष्ट जल प्रबंधन के लिए स्कूल प्रबंधन को सम्मानित किया। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी अंकित गुप्ता ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की जल संचयन तकनीकों को अपने घरों में भी अपनाएं। उन्होंने प्रोत्साहन के रूप में यह महत्वपूर्ण घोषणा भी की कि जो भी नागरिक अपने भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करेंगे, उन्हें नगर परिषद द्वारा होल्डिंग टैक्स में विशेष छूट दी जाएगी।
बोरिंग फेल होने के दौर में सामूहिक प्रयास की दरकार
भूजल पर बढ़ती मानवीय निर्भरता और अंधाधुंध दोहन के चलते कोडरमा के कई इलाकों में मॉनसून के दौरान भी बोरिंग और ट्यूबवेल फेल हो रहे हैं। लगातार नीचे जाते वाटर टेबल के बीच क्लोरोफिल स्कूल का यह मॉडल पूरे जिले के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक बन चुका है। पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर व्यक्ति को अपने स्तर पर आगे आकर वर्षा जल को सहेजने का संकल्प लेना होगा।


