
JSSC -CGL: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित सीजीएल परीक्षा और उसके जरिए बहाल हुए नवनियुक्त अफसरों की बर्खास्तगी के सरकारी आदेश पर झारखंड हाई कोर्ट ने अपना रुख सख्त रखा है। शुक्रवार को हुई अहम सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार के आदेश पर लगी रोक को बरकरार रखते हुए चयनित अफसरों को बड़ी राहत दी है। सरकार के अचानक आए फैसले से अपनी नौकरी पर संकट मंडराता देख इन अधिकारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जहां से फिलहाल उन्हें बड़ा संबल मिला है।

सैकड़ों अफसरों के भविष्य पर टिकीं अदालत की निगाहें
हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से चयनित सैकड़ों नवनियुक्त अफसरों की ओर से दायर याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। याचिका दाखिल करने वालों में निरोज कुमार खेस, रमेश उरांव सहित कई अन्य चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं। प्रार्थियों की ओर से राज्य के पूर्व महाधिवक्ता व वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, कुमार हर्ष, अमृतांश वत्स, दीपांकर राय, अर्पण मिश्रा और अंकित विशाल ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा।

सरकार की मोहलत की मांग पर सख्त रुख
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश देश की जानी-मानी वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह सैकड़ों युवाओं के भविष्य और आजीविका से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है, लिहाजा इसमें लंबा वक्त मांगना किसी भी तरह से उचित नहीं है। अदालत ने सरकार की लंबी मोहलत की मांग ठुकराते हुए महज 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया।
पुलिस जांच की धीमी रफ्तार पर अदालत की टिप्पणी
मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 17 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। पीठ ने कहा कि अदालत को जांच कर रही पुलिस पर पूरा भरोसा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि शुरुआती तेजी के बाद अब जांच की रफ्तार थोड़ी सुस्त पड़ गई है। अदालत के इस रुख के बाद अब 17 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे राज्य की निगाहें टिक गई हैं।


