
Jharkhand Police Association: झारखंड पुलिस एसोसिएशन के भीतर इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। कुछ दिन पहले तक जिस आंदोलन की तैयारी जोर-शोर से चल रही थी, उसे अचानक अगले आदेश तक टाल दिया गया और यही फैसला अब संगठन के लिए सिरदर्द बन गया है। नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि सदस्य अब खुलकर अपने ही नेतृत्व पर सवाल दाग रहे हैं और यह गुस्सा सिर्फ बंद कमरों तक सीमित नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और जमीनी स्तर तक फैल चुका है।

नेतृत्व पर सीधा हमला, दी गई ऐतिहासिक गद्दारों से तुलना
एसोसिएशन के कई सदस्यों का कहना है कि मौजूदा नेतृत्व ने अपनी हिम्मत और रीढ़ दोनों खो दी है। गुस्से में कुछ सदस्यों ने तो पदाधिकारियों की तुलना इतिहास के चर्चित विश्वासघातियों मीर जाफर और जयचंद तक से कर डाली है। सदस्यों का सीधा आरोप है कि एसोसिएशन अब सिर्फ नाम का संगठन रह गया है, जो न तो पुलिसकर्मियों की आवाज बुलंद कर पा रहा है और न ही उनकी रोजमर्रा की दिक्कतों का कोई हल निकाल पा रहा है।

चंदा बंद करने तक की उठी मांग
नाराजगी सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रही। कई जिला और क्षेत्रीय इकाइयों के सदस्यों ने अब एसोसिएशन को दी जाने वाली मासिक चंदा राशि पूरी तरह रोकने की मांग शुरू कर दी है। मकसद साफ है, नेतृत्व पर दबाव बनाना और उन्हें यह एहसास कराना कि आगे भी ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की मिसाल देकर उठाए सवाल
विरोध जता रहे पुलिसकर्मियों ने अपनी बात मजबूती से रखने के लिए राज्य के स्वास्थ्य महकमे का उदाहरण भी दिया है। उनका कहना है कि एक तरफ 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारी और स्वास्थ्यकर्मी अपनी मांगों के लिए चरणबद्ध तरीके से डटे हुए हैं और आंदोलन की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस एसोसिएशन ऐन मौके पर पीछे हट गया। इसी तुलना ने नेतृत्व की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
विधायक के बयान पर चुप्पी बनी नया विवाद
गुस्साए सदस्यों ने एक और तीखा सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि विधायक जयराम महतो द्वारा पुलिसकर्मियों को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और गाली-गलौज के मामले में भी एसोसिएशन के पदाधिकारी अब तक चुप्पी साधे बैठे हैं। सदस्यों का सवाल है कि जब बात अपने साथियों के सम्मान की आती है, तो आखिर नेतृत्व की जुबान क्यों बंद हो जाती है। अब देखना यह होगा कि बढ़ते दबाव के बीच एसोसिएशन का नेतृत्व आगे क्या रुख अपनाता है।


