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दुमका में स्कूल की लापरवाही से बर्बाद हुआ 27 बच्चों का एक साल, पूरी क्लास हुई फेल, हेडमास्टर गायब!

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DumKa: झारखंड की उपराजधानी दुमका से शिक्षा जगत की एक ऐसी खबर सामने आई है जो सुनकर हर कोई अपना माथा पकड़ लेगा। यहां एक सरकारी स्कूल की लापरवाही की वजह से पूरे 27 बच्चों का एक साल बर्बाद हो गया, और अब सवाल यह उठ रहा है कि इस गलती की सजा आखिर मासूम बच्चों को क्यों भुगतनी पड़ी।

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पूरी क्लास हुई फेल, गांव में मचा हड़कंप

मामला दुमका जिले के जामा प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय पंचरुखी का है। इस स्कूल में आसपास के गांवों से आने वाले करीब 27 छात्र-छात्राओं ने इस साल नई शिक्षा नीति के तहत आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा दी थी। जब नतीजे आए तो सभी हैरान रह गए, क्योंकि इस परीक्षा में एक भी बच्चा पास नहीं हो पाया। पूरी की पूरी क्लास फेल हो गई। यह नतीजा देखकर अभिभावकों के पैरों तले जमीन खिसक गई और उन्होंने इसकी शिकायत जिले के अधिकारियों तक पहुंचाई, लेकिन शिकायत के बावजूद किसी ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

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मौके पर पहुंचे तो हेडमास्टर मिले ही नहीं

इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए नक्षत्र समाचार की टीम खुद स्कूल पहुंची, लेकिन वहां प्रधानाध्यापक का कहीं अता-पता नहीं था। दिलचस्प बात यह है कि यही प्रधानाध्यापक पिछले करीब 15 से 16 साल से इसी स्कूल में पदस्थापित हैं और साथ ही प्रखंड के मैसेंजर का काम भी संभालते हैं, जिस वजह से स्कूल में उनकी मौजूदगी कभी-कभार ही देखने को मिलती है। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि पढ़ाई और बच्चों के भविष्य को लेकर उनकी गंभीरता कितनी रही होगी।

शिक्षक ने खुद मानी स्कूल की गलती

प्रधानाध्यापक की गैरमौजूदगी में मौके पर मौजूद प्रभारी शिक्षक विनोद कुमार चौधरी ने पूरे मामले पर हैरान करने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस खराब नतीजे के पीछे पूरी गलती स्कूल प्रशासन की है, क्योंकि छात्रों को मिलने वाले इंटरनल मार्क्स ही स्कूल की तरफ से चढ़ाए ही नहीं गए थे। शिक्षक के मुताबिक लिखित परीक्षा में सभी बच्चे पास थे, लेकिन स्कूल की जिम्मेदारी निभाने वालों की लापरवाही की वजह से रिजल्ट बिगड़ गया। अब इस गड़बड़ी को सुधरवाने के लिए मामला जैक बोर्ड भेजा गया है।

एक साल किसकी गलती की भेंट चढ़ा?

परीक्षा हुई, रिजल्ट आया और बच्चे फेल घोषित कर दिए गए, लेकिन इस बीच किसी का भी अगली कक्षा में नामांकन नहीं हो सका और स्कूल का पूरा सत्र आगे बढ़ गया। यानी जिन 27 विद्यार्थियों का पूरा एक साल स्कूल के प्रधानाध्यापक धनेश्वर कुमार की कथित लापरवाही की वजह से बर्बाद हुआ, अब सवाल यही है कि इसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा। यह फैसला अब शिक्षा विभाग और सिस्टम को ही लेना है। दुमका से सामने आई यह लापरवाही अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करती है, और यह भी कि इतनी बड़ी चूक के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई कब होगी, इसका जवाब फिलहाल आने वाला वक्त ही देगा।

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