
RIMS Ranchi News: मेडिकल कॉलेज में पहला दिन हर छात्र के लिए खास होता है। किताबों और परीक्षा से आगे अब मरीज, अस्पताल और एक जिम्मेदार डॉक्टर बनने की तैयारी शुरू होती है। रांची के RIMS में भी सोमवार को कुछ ऐसा ही माहौल रहा, जब MBBS के नए विद्यार्थियों ने संस्थान में अपने मेडिकल सफर की शुरुआत की।

नव-नामांकित विद्यार्थियों के लिए ‘आरोहण–2026’ फाउंडेशन कोर्स का औपचारिक शुभारंभ किया गया। ओरिएंटेशन डे के दौरान छात्रों का स्वागत किया गया और उन्हें RIMS की पढ़ाई, संस्थान की संस्कृति और एक डॉक्टर के रूप में उनकी जिम्मेदारियों से परिचित कराया गया।

पहली बार 250 छात्रों का नया बैच
इस साल RIMS के MBBS पाठ्यक्रम में पहली बार 250 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है। इनमें राज्य कोटे के साथ केंद्रीय कोटे से दाखिला लेने वाले विद्यार्थी भी शामिल हैं।
नए बैच के छात्र पूरे उत्साह के साथ ओरिएंटेशन कार्यक्रम में शामिल हुए। उनके लिए यह सिर्फ कॉलेज में दाखिले का दिन नहीं, बल्कि डॉक्टर बनने की लंबी यात्रा की पहली सीढ़ी भी है।
‘डॉक्टर बनना सिर्फ किताबें पढ़ना नहीं’
RIMS के निदेशक प्रो. डॉ. डी. के. सिंह ने नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है। एक अच्छे डॉक्टर के लिए संवेदनशीलता, नैतिकता और जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने छात्रों को अनुशासन, लगातार पढ़ाई, मरीजों के प्रति सहानुभूति और टीम भावना को अपनी शिक्षा का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
पढ़ाई के साथ मरीजों को समझना भी जरूरी
डीन प्रो. डॉ. राजीव मिश्रा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश छात्रों के जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने नियमित पढ़ाई और समय प्रबंधन के साथ शिक्षकों और सहपाठियों के साथ बेहतर संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।
वहीं चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. हिरेन्द्र बिरुआ ने छात्रों को अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों के प्रति चिकित्सकीय जिम्मेदारियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा के शुरुआती दौर से ही छात्रों में मरीज-केंद्रित सोच विकसित करना जरूरी है।
सिर्फ डॉक्टर नहीं, बेहतर इंसान बनाने की तैयारी
डीन, स्टूडेंट वेलफेयर डॉ. राहुल प्रसाद ने छात्रों को RIMS में उपलब्ध छात्र सहायता, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों और व्यक्तित्व विकास से जुड़े अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने छात्रों से संस्थान में मिलने वाले अवसरों का सकारात्मक इस्तेमाल करने की अपील की।
एमईयू कोऑर्डिनेटर डॉ. मृत्युंजय मुंडू ने ‘आरोहण-2026’ की रूपरेखा समझाते हुए बताया कि फाउंडेशन कोर्स का मकसद नए छात्रों को मेडिकल कॉलेज के माहौल में सहज बनाना और चिकित्सा शिक्षा की बुनियादी समझ देना है।
3 अक्टूबर तक चलेगा ‘आरोहण-2026’
फाउंडेशन कोर्स 3 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान छात्रों को मेडिकल पढ़ाई के अलावा सॉफ्ट स्किल्स, कम्युनिकेशन, टीमवर्क, लीडरशिप, प्रोफेशनल व्यवहार, नैतिक मूल्य, टाइम मैनेजमेंट और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता जैसे विषयों से भी परिचित कराया जाएगा।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के मानकों के अनुसार फाउंडेशन कोर्स मेडिकल स्नातक शिक्षा का जरूरी हिस्सा है। इसका मकसद नए छात्रों को मेडिकल कॉलेज के माहौल और आगे आने वाली पेशेवर जिम्मेदारियों के लिए शुरुआत से तैयार करना है।
कार्यक्रम में RIMS के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी और संबंधित कर्मचारी मौजूद रहे। नए विद्यार्थियों ने भी उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया और RIMS में डॉक्टर बनने की अपनी नई यात्रा शुरू की।


