
Simdega: जलडेगा की ओर जाते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की का काफिला जंगल क्षेत्र से गुजर रहा था। तभी उनकी नजर पेड़ों पर हो रहे लाह उत्पादन पर पड़ी और उन्होंने रास्ते में ही रुककर इसे करीब से देखने का फैसला किया। मंत्री ने लाह उत्पादन में जुटे ग्रामीणों से बातचीत की और जानने की कोशिश की कि इस काम से उन्हें कितनी कमाई हो रही है और रोजमर्रा में किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री मंगलवार को जलडेगा प्रखंड के दौरे पर थीं। इसी दौरान उन्होंने ग्रामीणों से सीधे जुड़कर लाह उत्पादन की जमीनी स्थिति को समझा।

पेड़ों से कितनी कमाई हो रही है?
मंत्री ने ग्रामीणों से पूछा कि लाह का उत्पादन कैसा चल रहा है, इससे उनकी आमदनी कितनी बढ़ रही है और उत्पादन के दौरान उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने लाह उत्पादन से जुड़ी अपनी जरूरतों और समस्याओं के बारे में उन्हें जानकारी दी।
मंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से भी इलाके में लाह उत्पादन की स्थिति और इसकी संभावनाओं के बारे में जानकारी ली।
जंगल की उपज से गांव में रोजगार का रास्ता
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि लाह को सिर्फ जंगल से मिलने वाले उत्पाद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अगर इसे सही तरीके से बढ़ावा दिया जाए तो यह ग्रामीण परिवारों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बन सकता है।
उन्होंने कहा कि लाह उत्पादन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाकर ग्रामीणों को उनके अपने इलाके में रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
तकनीकी मदद और संसाधन देने का निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लाह उत्पादन में लगे ग्रामीणों को जरूरी तकनीकी जानकारी, संसाधन और दूसरे स्तर पर सहयोग उपलब्ध कराया जाए। साथ ही इलाके में उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम करने को कहा।
उनका जोर इस बात पर रहा कि लाह उत्पादन से जुड़े ग्रामीणों को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें बेहतर तकनीक और जरूरी सहयोग देकर उनकी आमदनी बढ़ाने की दिशा में काम किया जाए।
विधायक ने भी बताईं ग्रामीणों की परेशानियां
मौके पर कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी भी मौजूद रहे। उन्होंने लाह उत्पादन से जुड़े ग्रामीणों की समस्याओं से मंत्री को अवगत कराया और क्षेत्र की जरूरतों की जानकारी दी।
मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इससे उम्मीद है कि जलडेगा और आसपास के इलाकों में लाह उत्पादन को आने वाले समय में ज्यादा व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा दिया जा सकेगा।


