
Ranchi: पुलिस थानों में जाकर शिकायत दर्ज करानी हो या किसी मामले की जांच, अक्सर लोगों के मन में वहां की कार्यप्रणाली और व्यवहार को लेकर कई सवाल रहते हैं। लेकिन अब झारखंड के थानों की तस्वीर और अंदर का माहौल बदलने वाला है। थानों के भीतर की हर एक गतिविधि पर अब चौबीसों घंटे ‘तीसरी आंख’ की पैनी नजर रहेगी। राज्य सरकार ने झारखंड के 606 पुलिस थानों को पूरी तरह से हाईटेक सीसीटीवी कैमरों से लैस करने की एक बड़ी योजना को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के लिए करीब 90 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति भी जारी कर दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पारदर्शी व्यवस्था की पहल
यह पूरी कवायद सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के तहत की जा रही है, जिनमें देश भर के पुलिस थानों में पारदर्शिता लाने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया था। सरकार की इस योजना के तहत थानों के लगभग हर उस हिस्से पर कैमरे तैनात होंगे जहां जनता की आवाजाही होती है। थानों के मुख्य प्रवेश और निकास द्वार से लेकर रिसेप्शन, लॉबी, बरामदे, हवालात के आसपास का इलाका और थाना प्रभारी के कमरे के आसपास का परिसर भी इन कैमरों की निगरानी में रहेगा। ये कैमरे सिर्फ तस्वीरें ही नहीं लेंगे, बल्कि इनमें रात के समय भी स्पष्ट ऑडियो और वीडियो रिकॉर्ड करने की सुविधा होगी।

थानों में लगेंगे तीन अलग-अलग श्रेणियों के हाईटेक कैमरे
सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए थानों में जरूरतों के हिसाब से तीन अलग-अलग प्रकार के कुल 9,006 कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें थानों के अंदरूनी हिस्सों के लिए 5,012 डोम कैमरे, बाहरी परिसरों के लिए 3,388 बुलेट कैमरे और 606 मोटराइज्ड वारिफोकल कैमरे शामिल हैं। इन सभी कैमरों की रिकॉर्डिंग को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का भी पूरा इंतजाम किया जाएगा, ताकि किसी शिकायत या जांच के दौरान पुरानी फुटेज को एक मजबूत और निष्पक्ष सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके।
पांच साल का प्लान और जिला कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग
इस पूरी परियोजना को साल 2026-27 से लेकर 2030-31 तक अलग-अलग चरणों में पूरा करने का खाका तैयार किया गया है। कैमरों की खरीद और उन्हें लगाने का जिम्मा जैप-आईटी संस्था को सौंपा गया है। इसके अलावा जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम भी बनाया जाएगा, जहां से पूरे जिले के थानों पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। इस नई व्यवस्था के लागू होने से थानों की कार्यशैली में सुधार आएगा और किसी भी विवाद की स्थिति में दूध का दूध और पानी का पानी हो सकेगा।


