Homeझारखंडआपसी सुलह के बाद दुश्मनी खत्म, झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास...

आपसी सुलह के बाद दुश्मनी खत्म, झारखंड हाईकोर्ट ने हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट की पूरी FIR की रद्द

Published on

spot_img
spot_img
- Advertisement -

Jharkhand High Court: कानून की किताबें भले ही धाराओं और दलीलों से बंधी हों, लेकिन जब दो पक्षों के बीच सालों पुरानी रंजिश की दीवार ढह जाए और वे गिले-शिकवे मिटाकर एक-दूसरे को गले लगा लें, तो अदालतें भी सुलह के उस मानवीय पहलू को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं। झारखंड हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में बड़ा और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। धनबाद के चर्चित केंदुआडीह थाना क्षेत्र से जुड़े हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन मामले में अदालत ने आपसी समझौते के आधार पर पूरी प्राथमिकी को ही निरस्त कर दिया है।

- Advertisement -

साझा मित्रों की पहल और सुलह का रास्ता

यह मामला वर्ष 2022 में दर्ज केंदुआडीह थाना कांड संख्या 37/2022 से जुड़ा है। इसमें आरोपी गोलू रावनी उर्फ रवि कुमार के खिलाफ IPC की धारा 307 यानी जानलेवा हमले समेत कई गंभीर धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। वक्त गुजरने के साथ दोनों पक्षों के बीच की कड़वाहट कम हुई और साझा दोस्तों व शुभचिंतकों की सकारात्मक पहल रंग लाई। दोनों पक्षों ने बैठकर अपने मतभेद हमेशा के लिए खत्म कर लिए। मामले के सूचक ने भी अदालत के सामने दो टूक कह दिया कि अब उनके बीच कोई विवाद नहीं बचा है और वे इस मुकदमे को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। इस पर राज्य सरकार की तरफ से भी कोई एतराज नहीं जताया गया।

- Advertisement -

धारा 307 होने से केस स्वतः गंभीर नहीं बनता

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने कानून और न्याय के संतुलन को बेहद संजीदगी से सामने रखा। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए साफ किया कि केवल FIR में धारा 307 जोड़ देने भर से ही कोई मामला स्वतः ऐसा गंभीर अपराध नहीं बन जाता जिसे टाला न जा सके। अदालत का यह दायित्व है कि वह अपराध की वास्तविक प्रकृति, दोनों पक्षों की स्थिति और समाज पर पड़ने वाले उसके प्रभाव की गहराई से पड़ताल करे।

मुकदमा खींचना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ

पीठ ने अपने आदेश में माना कि यह पूरा विवाद बुनियादी रूप से दो पक्षों के बीच का एक निजी झगड़ा था। अब जब दोनों ही पक्ष पूरी तरह सहमत होकर एक मंच पर आ चुके हैं और सूचक स्वयं आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहता, तो ऐसी स्थिति में आरोपी के दोषी साबित होने की संभावना न के बराबर रह जाती है। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे हालात में मुकदमे को घसीटते रहना अदालती वक्त की बर्बादी तो है ही, साथ ही यह न्याय के मूल सिद्धांतों के भी खिलाफ होगा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया।

ताज़ा ख़बरें...

JDU के प्रदेश सचिव बने सोनू रजक, उमेश सिंह कुशवाहा और नीतीश पटेल का जताया आभार

पटना: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के युवा प्रकोष्ठ में प्रदेश सचिव बनाए जाने पर...

Menopause: आखिरी पीरियड के आसपास शरीर में क्यों हो सकते हैं अचानक बदलाव? नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

Health : मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति को आमतौर पर महिलाओं के शरीर में होने वाला...

IND vs WI: निर्णायक मुकाबले से पहले टीम इंडिया में बड़ा बदलाव, भुवनेश्वर की एंट्री से किसका कटेगा पत्ता?

Sports : भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज का...

‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस का एक्शन, नेहा बोरा-दीपके हिरासत में; दिल्ली में क्यों मचा घमासान?

New Delhi: राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के...

ये भी पढ़ें...

JDU के प्रदेश सचिव बने सोनू रजक, उमेश सिंह कुशवाहा और नीतीश पटेल का जताया आभार

पटना: जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के युवा प्रकोष्ठ में प्रदेश सचिव बनाए जाने पर...

Menopause: आखिरी पीरियड के आसपास शरीर में क्यों हो सकते हैं अचानक बदलाव? नई स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

Health : मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति को आमतौर पर महिलाओं के शरीर में होने वाला...

IND vs WI: निर्णायक मुकाबले से पहले टीम इंडिया में बड़ा बदलाव, भुवनेश्वर की एंट्री से किसका कटेगा पत्ता?

Sports : भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज का...