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रांची में यहां लाठी-डंडे लेकर घर में घुसे थे तीन युवक, दोष साबित होने के बाद अदालत ने प्रोबेशन एक्ट के तहत दी राहत

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Ranchi Civil Court: राजधानी रांची के जगन्नाथपुर इलाके में पांच साल पहले घर की चहारदीवारी फांदकर मारपीट करने और परिवार को धमकाने के मामले में अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। SDJM रूपम स्मृति टोपनो की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया। हालांकि, अदालत ने सख्त सजा देने के बजाय कानून के सुधारात्मक पहलू को प्राथमिकता दी और पहली बार अपराध में शामिल होने के आधार पर तीनों को कड़ी चेतावनी देकर रिहा करने का आदेश दिया।

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दोषी करार पर जेल से मिली राहत

अदालत ने जिन तीन आरोपियों को आरोपों में दोषी पाया है, उनमें बिस्वजीत गोस्वामी, अखिलेश कुमार उर्फ बिट्टू और राजकिशोर सिंह शामिल हैं। अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर माना कि इन तीनों ने घर में अनाधिकृत प्रवेश, गाली-गलौज और डराने-धमकाने का कृत्य किया था। इसके बावजूद कोर्ट ने देखा कि आरोपियों का यह पहला अपराध था और घटना की प्रकृति इतनी गंभीर नहीं थी कि उन्हें सीधे सलाखों के पीछे भेजा जाए। इसी वजह से अदालत ने प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की धारा तीन का लाभ देते हुए उन्हें सजा सुनाने के बजाय भविष्य में ऐसा न करने की सख्त हिदायत देकर छोड़ दिया।

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गेट फांदकर घर में घुसे थे हथियारबंद हमलावर

यह पूरा विवाद 5 मई 2019 की दोपहर का है। दर्ज मामले के अनुसार तीनों आरोपी हाथों में लाठी-डंडे लेकर जगन्नाथपुर स्थित सुखदेव शर्मा के मकान पर पहुंचे थे। मुख्य दरवाजा बंद होने पर आरोपियों ने कानून की परवाह किए बिना बाउंड्री का गेट फांद लिया और सीधे घर के अंदर घुस गए। उन्होंने परिसर में हंगामा मचाते हुए परिजनों को धमकाना शुरू कर दिया था।

पुलिस के पास जाने पर दी थी जान से मारने की धमकी

घर में घुसने के बाद आरोपियों ने परिवार के लोगों के साथ बदसलूकी की और उन्हें गलत तरीके से रोक कर रखा। जब पीड़ित परिवार ने विरोध जताया और पुलिस की मदद लेने की बात कही, तो आरोपियों ने उन्हें सीधे जान से मारने की धमकी दे डाली। इस घटना के बाद भयभीत परिजनों ने स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

पांच गवाहों की गवाही से साबित हुआ था जुर्म

मामले की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों का दोष साबित करने के लिए अदालत में कुल पांच गवाहों को पेश किया। गवाहों के बयानों और प्रस्तुत किए गए अन्य कानूनी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों पर लगे आरोपों को सही पाया। हालांकि, प्रोबेशन एक्ट के तहत मिली राहत ने तीनों दोषियों को जेल जाने से बचा लिया, लेकिन अदालत ने उन्हें भविष्य में कानून का सम्मान करने की सख्त नसीहत दी है।

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