
Ranchi : राजधानी रांची में फैटी लीवर की समय पर पहचान, रोकथाम और समुचित उपचार के उद्देश्य से इसी महीने के अंत तक ‘फैटी लीवर मुक्त रांची’ अभियान का शुभारंभ किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी पहल को रांची में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है। बुधवार को रांची सदर अस्पताल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सह रांची के सांसद संजय सेठ ने इस अभियान की विस्तृत रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि इस सघन अभियान के माध्यम से आगामी एक वर्ष के भीतर जिले के लगभग 1.20 लाख नागरिकों के लीवर स्वास्थ्य की जांच करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

चार अत्याधुनिक मोबाइल मेडिकल वैन से होगी ऑन-स्पॉट जांच
नागरिकों तक सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए अभियान के तहत चार विशेष मोबाइल मेडिकल वाहनों का संचालन किया जाएगा। इनमें से दो अत्याधुनिक वाहन रांची पहुंच चुके हैं, जबकि शेष दो वाहन भी जल्द ही बेड़े में शामिल हो जाएंगे। ये मोबाइल वैन जिले के विभिन्न मुहल्लों, ग्रामीण अंचलों और दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की ऑन-स्पॉट जांच सुनिश्चित करेंगी। अभियान के शुरुआती चरण में आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से जमीनी स्तर पर स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए ‘एबीसीडी जोखिम स्कोर’ (ABCD Risk Score) पद्धति का उपयोग कर अधिक जोखिम वाले मरीजों की पहचान की जाएगी और आवश्यक होने पर उन्हें विशेषज्ञ परामर्श व उच्च स्तरीय इलाज के लिए अस्पताल भेजा जाएगा।

1000 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण और 500 स्थानों पर मेडिकल कैंप
अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए जिले के सभी प्रखंडों और अनुमंडलीय अस्पतालों में तैनात लगभग 1,000 स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभियान के तहत पूरे जिले में करीब 500 प्रमुख स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां मोबाइल मेडिकल वैन नियमित रूप से शिविर लगाएंगी। इसके अलावा, युवाओं और किशोरों में स्वस्थ आदतों के विकास के लिए 100 से अधिक स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं को इस अभियान से जोड़ा जाएगा, जहां उन्हें संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
ILBS दिल्ली और डॉ. एसके सरीन के मार्गदर्शन में संचालन
यह संपूर्ण अभियान देश के विख्यात हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. एसके सरीन के कुशल मार्गदर्शन में सदर अस्पताल रांची और नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित ‘इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बायलरी साइंसेज’ (ILBS) के तकनीकी सहयोग से संचालित होगा। जांच प्रक्रिया में अल्कोहलिक (शराब जनित) और नॉन-अल्कोहलिक (खान-पान जनित) दोनों तरह के फैटी लीवर के मामलों की सटीक पड़ताल की जाएगी। इस परियोजना के लिए करीब 1.10 करोड़ रुपये की लागत वाली अत्याधुनिक जांच मशीन और उपकरणों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
शुरुआती पहचान से पूरी तरह नियंत्रित हो सकती है बीमारी: सिविल सर्जन
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रांची के सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अस्वस्थ खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता फैटी लीवर के मुख्य कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक अवस्था में ही इस बीमारी का पता चल जाए, तो खान-पान में सुधार और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे स्वास्थ्य शिविरों का लाभ उठाएं और नियमित अंतराल पर अपनी स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं।


