
Sahibganj News: गंगा नदी के लगातार बढ़ रहे जलस्तर ने साहिबगंज जिले के कई निचले और तटीय इलाकों में विकराल बाढ़ का रूप ले लिया है। चारों तरफ फैले पानी के बीच सबसे बदतर हालात रामपुर दियारा क्षेत्र के ग्रामीणों की थी, जहां जिंदगी पूरी तरह पानी के घेरे में कैद हो चुकी थी। नक्षत्र समाचार द्वारा ग्राउंड जीरो से बाढ़ पीड़ितों और उनके मवेशियों के दर्द को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। खबर का त्वरित असर यह हुआ कि प्रशासनिक अमला राहत सामग्री और पशु चिकित्सकों की टीम के साथ सीधे रामपुर दियारा के प्रभावित टोलों में पहुंच गया।

रामनगर और घुण्डर टोला में सूखा राशन वितरण
मुफस्सिल थाना और गंगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुदूर रामपुर दियारा स्थित रामनगर टोला और घुण्डर टोला में बाढ़ का पानी घुसने से लोग अपने घरों में बंधक जैसी स्थिति में थे। खबर पर संज्ञान लेते हुए साहिबगंज पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम नावों के जरिए इन जलमग्न इलाकों में पहुंची। टीम ने वहां फंसे परिवारों के बीच सूखा राशन, पीने का पानी और रोजमर्रा की अन्य जरूरी खाद्य सामग्रियां वितरित कीं, जिससे कई दिनों से दाने-दाने को तरस रहे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली।

मवेशियों के इलाज के लिए साथ पहुंची मेडिकल टीम
बाढ़ की इस विभीषिका में इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों पर भी भारी संकट आन पड़ा है। दियारा क्षेत्र में चारों तरफ पानी भर जाने के कारण पशुओं के चारे की भारी किल्लत हो गई थी और जलजमाव की वजह से मवेशियों में संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा था। इसे देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाई और पशु चिकित्सकों की टीम को भी मौके पर ले जाया गया। डॉक्टरों ने बीमार मवेशियों की जांच की और ग्रामीणों को आवश्यक दवाइयां व निर्देश उपलब्ध कराए।
4 थानों में लंगर से परोसा जा रहा गर्म खाना
इधर, पुलिस विभाग के मुखिया साहिबगंज एसपी अमित कुमार सिंह के विशेष निर्देश पर जिले में मानवीय पहल की शुरुआत की गई है। जिले के चार प्रमुख थानों में नियमित लंगर की व्यवस्था की गई है, जिसके जरिए बाढ़ से विस्थापित और बेघर हुए लोगों को दिन-रात गर्म और ताजा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
24 घंटे मुस्तैद है रेस्क्यू दल
साहेबगंज पुलिस के अनुसार, गंगा के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने और उन्हें हर संभव मदद देने के लिए पुलिस और प्रशासनिक टीमें चौबीसों घंटे जमीनी स्तर पर मुस्तैद हैं। संकट की इस घड़ी में पुलिस का यह मानवीय चेहरा स्थानीय लोगों के लिए बड़ा संबल साबित हो रहा है।


