
Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न पर चुनाव आयोग द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद ममता बनर्जी गुट ने अपनी चुनावी रणनीति के तहत तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं। पार्टी पर वर्चस्व को लेकर चल रहे विवाद के बीच आयोग के निर्देश का पालन करते हुए ममता बनर्जी खेमे ने चुनाव आयोग (EC) को अपनी पसंद के तीन नए नाम और दो नए चुनाव चिन्हों के विकल्प औपचारिक रूप से सौंप दिए हैं। आयोग की फ्री सिंबल लिस्ट से चुने गए इन विकल्पों पर अब निर्वाचन आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

पहचान बनाए रखने के लिए नाम में ममता और तृणमूल दोनों शामिल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी गुट ने मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ और साख को अक्षुण्ण रखने के लिए सोची-समझी रणनीति तैयार की है। आयोग को जो तीन संभावित नाम सुझाए गए हैं, उन सभी में पार्टी की मूल पहचान ‘तृणमूल कांग्रेस’ के साथ-साथ पार्टी सुप्रीमो ‘ममता बनर्जी’ का नाम भी प्रमुखता से जोड़ा गया है। इस कदम का सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सिंबल या नाम में किसी भी तकनीकी बदलाव के बावजूद आम जनता और मतदाताओं के बीच यह स्पष्ट संदेश रहे कि यही गुट मूल तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी का वास्तविक प्रतिनिधित्व करता है।

स्पोर्ट्स थीम वाले सिंबल को दी प्राथमिकता
नए चुनाव चिह्न के चयन में ममता बनर्जी खेमे ने खेल यानी स्पोर्ट्स की थीम पर विशेष भरोसा जताया है। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग के समक्ष रखे गए दोनों सिंबल के विकल्प खेल-कूद से जुड़े प्रतीकों के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं। आयोग द्वारा जारी मुक्त चुनाव चिह्नों (फ्री सिंबल्स) की अधिकृत सूची में से ही इन दो विकल्पों को वरीयता क्रम में छांटकर सौंपा गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि खेल से जुड़े प्रतीक मतदाताओं के बीच आसानी से पहचान बनाने और प्रचार अभियानों में ऊर्जा भरने के लिहाज से काफी प्रभावी साबित हो सकते हैं।
उपचुनाव से पहले आयोग ने फ्रीज किया था नाम और सिंबल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ही पार्टी के आधिकारिक संगठन, कोष और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न पर दावे को लेकर दोनों गुट लंबे समय से आमने-सामने थे। विवाद गहराने पर दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग का रुख किया था। आयोग ने दोनों पक्षों को अपने-अपने दावे, वैधानिक दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत करने के तीन अवसर दिए। आगामी उपचुनावों की निष्पक्षता और विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तहत अगले आदेश तक दोनों पक्षों के लिए ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी तथा दोनों ही गुटों को नए नाम व सिंबल के विकल्प देने का निर्देश दिया था। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि आयोग ममता गुट को कौन सा नाम और सिंबल आवंटित करता है।


