
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट में JPSC-JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के मामले की सुनवाई के दौरान एक बिल्कुल अलग लेकिन गंभीर मुद्दा सामने आ गया। सुनवाई के दौरान ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अदालत को बदनाम करने से जुड़ा मामला अदालत के संज्ञान में लाया गया।

वकील ने कोर्ट को दी जानकारी
अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत को बताया कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बे-सिर-पैर की खबरें फैलाई जा रही हैं, जिनका हाईकोर्ट की गरिमा पर सीधा नकारात्मक असर पड़ रहा है। उन्होंने कोर्ट के सामने कहा कि यह पूरा मामला अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है और इस पर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
दिया हवालाअपनी बात को मजबूती देने के लिए अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया है कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की अनुमति के बिना कोर्ट की कार्यवाही की कोई भी क्लिपिंग, चाहे वह आंशिक हो या पूरी, किसी वेबसाइट पर इस्तेमाल नहीं की जा सकती। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि इस आदेश के बावजूद ऐसी क्लिपिंग लगातार सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
जस्टिस दीपक रोशन ने दिया यह जवाब
अधिवक्ता की बात ध्यान से सुनने के बाद जस्टिस दीपक रोशन ने कहा कि अगर इस मामले में कोई औपचारिक याचिका दाखिल की जाती है, तो अदालत उसे जरूर देखेगी। यानी फिलहाल कोर्ट ने इस विषय को संज्ञान में लेते हुए आगे की कार्रवाई के लिए औपचारिक याचिका का रास्ता सुझाया है। अब देखना यह होगा कि इस दिशा में आगे कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।


