
Digital Desk Naxatra: अपनी शांत आबो-हवा, हरियाली और सादगी के लिए पहचाने जाने वाले शहर रांची की आबो-हवा में अब नशे का जहर घुलने लगा है। चमक-धमक वाली नाइट लाइफ और मौज-मस्ती के नाम पर शहर के भीतर नशीले पदार्थों का एक बेहद खतरनाक और संगठित नेटवर्क खड़ा हो चुका है।

शहर के महंगे बार, रेस्टोरेंट और शहर के बाहरी इलाकों में बने हाई-प्रोफाइल फार्म हाउस इस काले कारोबार का सुरक्षित ठिकाना बन चुके हैं। मोबाइल ऐप्स के जरिए किराए पर लिए गए फ्लैटों, बंगलों और फार्म हाउसों में देर रात शुरू होने वाली पार्टियां सुबह 5 बजे तक चलती हैं, जहां युवा नशीली दवाओं के अंधेरे गर्त में धकेल दिए जा रहे हैं।

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लाखों में बिक रहा नशा और नीदरलैंड से जुड़ते तार
इस संगठित नेटवर्क के तहत बिकने वाले ड्रग्स की कीमतें किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी हैं। कोकीन जहां 15 हजार रुपये प्रति ग्राम तक बेची जा रही है, वहीं MDMA 12 हजार रुपये प्रति ग्राम और एक्सटेसी की गोलियां 2500 रुपये प्रति पीस के हिसाब से खपाई जा रही हैं।
यह नशा सिर्फ पड़ोसी राज्यों या दिल्ली, गोवा और कोलकाता जैसे शहरों से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से भी मंगाया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण तब सामने आया जब प्रशिक्षु IPS साक्षी जमुआर और कोतवाली DSP प्रकाश सोय के नेतृत्व में पुलिस ने पंडरा इलाके से एक युवक को गिरफ्तार किया।
आरोपी ने क्रिप्टो करेंसी के जरिए भुगतान करके नीदरलैंड से पार्सल के जरिए खतरनाक LSD यानी एसिड मंगाया था, जिसे उसने पोस्ट ऑफिस से रिसीव किया था।
होटल BNR में मारपीट और इवेंट कंपनियों पर गहराता शक
नशे के इस बढ़ते कारोबार का असर अब शहर की कानून-व्यवस्था पर भी दिखने लगा है। बीते दिनों चुटिया स्टेशन रोड स्थित होटल BNR में एक निजी इवेंट कंपनी द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान जमकर बवाल हुआ। रंग-गुलाल के इस कार्यक्रम में शराब के साथ-साथ ब्राउन शुगर और LSD जैसे खतरनाक नशीले पदार्थ परोसे जाने का आरोप लगा। नशे में धुत दो गुटों के बीच हुई खूनी झड़प में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस तरह के आयोजनों के पीछे कई इवेंट कंपनियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जो कानून और हाई कोर्ट के नियमों को ताक पर रखकर ऐसी पार्टियां आयोजित करा रही हैं।

कागज के टुकड़े में छिपा कातिल नशा और NCB की चेतावनी
इस पूरे नेटवर्क में सबसे ज्यादा चिंता की बात synthetic और पार्टी ड्रग्स की बढ़ती मांग है। पार्सल से पकड़ा गया LSD एक ऐसा कृत्रिम नशा है, जिसे सोखने वाले कागजों के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लगाया जाता है। इसे किताब या जेब में रखकर आसानी से ले जाया जा सकता है, जिससे इसे पहचान पाना बेहद मुश्किल होता है। एक बार इसके सेवन के बाद इंसान 7 से 12 घंटे तक इसके असर में रहता है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के आंकड़ों के मुताबिक, देश भर में पिछले पांच वर्षों में MDMA और मॉली जैसे पार्टी ड्रग्स की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। पुलिस अब इनपुट जुटाकर इस पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ने की तैयारी में जुटी हुई है।



