
Ranchi: रांची के बेड़ो स्थित करम चंद भगत महाविद्यालय में शनिवार को करम पर्व की पूर्व संध्या पर माहौल पूरी तरह झारखंडी रंग में रंगा नजर आया। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की ओर से आयोजित करम पूर्व संध्या 2026 में छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक नृत्य और गीतों के जरिए झारखंड की लोक-संस्कृति, प्रकृति प्रेम और सामाजिक परंपराओं की खूबसूरत तस्वीर पेश की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रसनजीत मुखर्जी रहे। वहीं पूर्व प्राचार्य डॉ. डेला माई हांसदा और डॉ. मथुरा राम उस्ताद विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों और शिक्षकों के स्वागत से हुई। नागपुरी और कुड़ुख विभाग के विद्यार्थियों ने पारंपरिक अंदाज में अतिथियों का स्वागत किया, जिसके बाद अतिथियों ने करम चंद भगत की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।

सरना प्रार्थना के साथ शुरू हुआ सांस्कृतिक सफर
सरना प्रार्थना के बाद कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। नागपुरी विभाग की डॉ. पूनम कुमारी ने स्वागत भाषण दिया, जबकि मंच संचालन की जिम्मेदारी डॉ. राजा सिंह ने संभाली।
इसके बाद शुरू हुई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया। कुड़ुख, नागपुरी, इतिहास और राजनीति शास्त्र विभाग की नृत्य मंडलियों ने पारंपरिक नृत्य पेश किए। विद्यार्थियों की सामूहिक प्रस्तुति ने भी खूब तालियां बटोरीं। सभागार में मौजूद छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
कुड़ुख नृत्य मंडली ने हासिल किया पहला स्थान
करम पर्व के मौके पर आयोजित नृत्य प्रतियोगिता के लिए चार सदस्यीय निर्णायक मंडल बनाया गया था। इसमें डॉ. नेहा टोप्पो, डॉ. मीना पूर्ति, प्रो. अभिनीत तिर्की और प्रो. प्रवीण दास शामिल रहे। निर्णायकों ने सभी टीमों की प्रस्तुतियों का बारीकी से मूल्यांकन करने के बाद परिणाम घोषित किया।
प्रतियोगिता में कुड़ुख नृत्य मंडली ने पहला स्थान, नागपुरी विभाग की नृत्य मंडली ने दूसरा स्थान और इतिहास विभाग की नृत्य मंडली ने तीसरा स्थान हासिल किया। विजेता टीमों को प्राचार्य डॉ. प्रसनजीत मुखर्जी और मौजूद अतिथियों ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया।
‘हर चाल नृत्य है और हर बोल गीत’
इस मौके पर प्राचार्य डॉ. प्रसनजीत मुखर्जी ने करम पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए कहा, “झारखंड में हर चाल नृत्य है और हर बोल गीत है।” उन्होंने करम पर्व को आदिवासी और सदान समाज की एकता से जोड़ते हुए कहा कि यह पर्व प्रकृति के साथ झारखंड के गहरे रिश्ते को सामने लाता है।
उन्होंने करम वृक्ष के औषधीय महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड की आदिवासी-मूलवासी जीवनशैली प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। उनका कहना था कि अगर दुनिया इस जीवन-पद्धति से सीख ले तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।
भाई-बहन के रिश्ते और प्रकृति प्रेम का पर्व
विशिष्ट अतिथि डॉ. डेला माई हांसदा ने करम पर्व को भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और पारिवारिक रिश्तों की मजबूती से जुड़ा पर्व बताया। वहीं डॉ. मथुरा राम उस्ताद ने कहा कि करम पर्व झारखंडवासियों के प्रकृति प्रेम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की भावना को दर्शाता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. राजा सिंह, डॉ. संतोष कुमार भगत, डॉ. प्रमिला उरांव, डॉ. पूनम कुमारी और धीरज उरांव के नेतृत्व में अंकित, ऋतिक, बबलू, कुलदीप, सागर, रोहन, अजय, अमित, रिशु, अनिल, अजीत, राहुल, कमलेश, हर्ष, सोनू, कार्तिक सहित कई विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम में कॉलेज के शिक्षक-शिक्षिकाओं, शिक्षकेतर कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। इनमें डॉ. ब्रह्मानंद साहू, डॉ. संतोष भगत, अरविंद राणा बिलुंग, डॉ. आशा रानी लकड़ा, डॉ. मीना पूर्ति, प्रवीण दास, नितेश पासवान, डॉ. सर्वाणी चक्रवर्ती, डॉ. स्मिता गुप्ता, उम्मे कुलसुम, डॉ. सुजाता बाला, डॉ. वी.एन. पांडेय, डॉ. अल्पना मेहता, विकास सिन्हा, निरु कुमारी, सुनीता उरांव, डॉ. जे.डी. राम, डॉ. बदीउज़्ज़माँ, सरफराज आलम, संजय कुमार, आशीष सिंह, साईनाथ राम और अजय कुमार बबलू समेत अन्य लोग शामिल रहे।
छात्र-छात्राओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने करम पर्व की सांस्कृतिक और सामाजिक भावना को और जीवंत कर दिया। अंत में अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया गया और इसी के साथ करम पूर्व संध्या 2026 कार्यक्रम का समापन हुआ।


