
Imran Khan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की तीन बहनों की 30 दिनों की निवारक हिरासत का मामला गरमाता जा रहा है। सोमवार को लाहौर हाईकोर्ट में अलीमा खान, उजमा खान और नूरीन नियाजी की हिरासत को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की गई। यह याचिका अलीमा खान के बेटे शहरेज खान की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें अदालत से हिरासत के आदेश को पूरी तरह रद्द करने और तीनों महिलाओं की तुरंत रिहाई की गुहार लगाई गई है।

क्या है पूरा मामला और प्रशासनिक कार्रवाई
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लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (MPO) ऑर्डिनेंस की धारा-3 के तहत इन तीनों बहनों को 30 दिनों तक हिरासत में रखने का आदेश जारी किया था। प्रशासनिक आदेश के तहत उजमा और नूरीन को सोमवार को हिरासत में लिया गया, जबकि अलीमा खान को एक दिन पहले ही पकड़ लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद तीनों को लाहौर की कुख्यात कोट लखपत जेल भेज दिया गया है।
याचिका में लगाया गया गैरकानूनी हिरासत का आरोप

दायर की गई याचिका में शहरेज खान ने आरोप लगाया है कि 20 सितंबर को अलीमा की गिरफ्तारी का आदेश पूरी तरह से गैरकानूनी और मनमाना है। याचिका में साफ कहा गया है कि जब अलीमा को उनके ड्राइवर मुहम्मद आमिर के साथ हिरासत में लिया गया, तब वे किसी निजी काम से जा रही थीं और वहां ऐसा कोई भी सार्वजनिक जमावड़ा या माहौल नहीं था जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का कोई खतरा पैदा होता। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि प्रशासन के हिरासत आदेश में अलीमा की ऐसी किसी भी विशिष्ट या संदिग्ध गतिविधि का जिक्र नहीं किया गया है, जिससे इस तरह की सख्त निवारक हिरासत को उचित ठहराया जा सके।
परिवार का कड़ा विरोध और सोशल मीडिया पर बयान
इस कार्रवाई से सिर्फ शहरेज ही नहीं, बल्कि इमरान खान का परिवार भी बेहद आक्रोशित है। इमरान खान के बेटे कासिम खान ने भी अपनी बुआओं उजमा और नूरीन की गिरफ्तारी पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर यह दावा किया है कि इस प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान परिवार के कुछ अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया गया है। बहरहाल, अब सबकी निगाहें लाहौर हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है।


