
Ranchi: राजधानी रांची के डोरंडा स्थित मनिटोला, फिरदौस नगर में ग्यारहवीं शरीफ के पावन मौके पर दो दिवसीय उर्स-ए-गौसुल आज़म का भव्य आयोजन होने जा रहा है। 22 और 23 सितंबर को आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय उर्स को लेकर खानकाह मजहरिया मुनअमिया और आसपास के पूरे इलाके में तैयारियां जोरों पर हैं। पूरे क्षेत्र को बेहद खूबसूरती से सजाया-संवारा जा रहा है। खानकाह के सज्जादानशीन अल्हाज सैय्यद शाह अल्कमा शिब्ली कादरी की देखरेख में आयोजित होने वाले इस उर्स में झारखंड के कोने-कोने के अलावा देश के कई अन्य राज्यों से भी भारी संख्या में जायरीन और अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

खानकाह मजहरिया में तैयारियां तेज, जायरीनों के लिए खास इंतजाम
आयोजन समिति और सज्जादानशीन की ओर से बाहर से आने वाले जायरीनों के ठहरने, सुरक्षा और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। आम अकीदतमंदों के साथ-साथ कई वीआईपी और विशिष्ट अतिथियों के आगमन को देखते हुए भी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। उर्स के दौरान दोनों दिन आने वाले तमाम लोगों के लिए लंगर-ए-गौसिया का विशेष प्रबंध रहेगा, जहां अकीदतमंदों के बीच लंगर तकसीम किया जाएगा। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सूफियाना कव्वाली, तकरीर और फातिहाखानी इस दो दिवसीय आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगे।

22 सितंबर: कुरआनखानी से होगी शुरुआत, गूंजेगी पटना के कव्वालों की आवाज़
दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रमों का आगाज 22 सितंबर को तड़के फजिर की नमाज के बाद कुरआनखानी और परचमकुशाई यानी ध्वजारोहण के साथ होगा। इसके बाद शाम 5 बजे गागर शरीफ का एहतमाम किया जाएगा। शाम 7 बजे से फातिहाखानी और हल्का-ए-जिक्र की महफिल सजेगी। रात 8 बजे से 10 बजे तक चलने वाली महफिल-ए-समा में विशेष रूप से पटना की प्रसिद्ध खानकाह से आए कव्वाल अपनी रूहानी और सूफियाना कव्वाली पेश कर समां बांधेंगे। इसके बाद रात 10 बजे सभी अकीदतमंदों के बीच लंगर-ए-गौसिया का वितरण किया जाएगा।
23 सितंबर: जलसा और मिलाद शरीफ के बाद कुल की रस्म के साथ समापन
उर्स के दूसरे और अंतिम दिन 23 सितंबर को सुबह 10 बजे से मिलाद शरीफ और जलसा-ए-गौसुल आज़म का आयोजन होगा। इस जलसे में शहर के कई नामचीन आलिम और बुद्धिजीवी शिरकत करेंगे और तकरीर पेश करेंगे। दोपहर 12 बजे फातिहाखानी के बाद दोबारा महफिल-ए-समा का दौर शुरू होगा और दोपहर 2 बजे जायरीनों के बीच लंगर बांटा जाएगा। इसके बाद रात 8 से 10 बजे के बीच आखिरी कुल की रस्म, सूफियाना कव्वाली और लंगर वितरण के साथ दो दिवसीय ऐतिहासिक उर्स-ए-गौसुल आज़म का अकीदत के साथ समापन होगा।


