
Bokaro: बोकारो स्टील प्लांट के निर्माण के लिए अपनी पुरखों की जमीन देने वाले एक विस्थापित परिवार के बेटे को आज अपने जायज हक के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। बोकारो जनरल अस्पताल में आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए सुपरवाइजर के पद पर तैनात सजल कुमार को महज चार महीने की सेवा के बाद बिना कोई कारण बताए हटा दिया गया। अब न्याय पाने के लिए सजल कुमार अपने छोटे-छोटे बच्चों और पूरे परिवार के साथ टूटेन गार्डन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी नौकरी बहाल नहीं की जाती, तब तक उनका यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

चार महीने में निकाला, श्रम विभाग का आदेश भी नहीं माना
पीड़ित सजल कुमार के अनुसार, 10 अप्रैल 2023 को आउटसोर्सिंग एजेंसी ‘इंटेलिजेंस सिक्योरिटी ऑफ इंडिया’ के जरिए उन्हें बोकारो जनरल अस्पताल में सुपरवाइजर नियुक्त किया गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें अचानक काम से बाहर कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने सेल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनी के चक्कर लगाए, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। मामला जब श्रम विभाग पहुंचा, तो सहायक श्रमायुक्त केंद्रीय, धनबाद-2 ने 24 जून 2026 को सजल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दोबारा नियुक्ति का स्पष्ट आदेश दिया। इसके बावजूद प्रबंधन ने सरकारी आदेश को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

पूरे परिवार के साथ पार्क में डाला डेरा, सेल प्रबंधन का पक्ष आना बाकी
अधिकारियों और कंपनी के इस रवैये से आहत होकर सजल कुमार के पास आंदोलन के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा। वे अपने मासूम बच्चों और पत्नी के साथ टूटेन गार्डन में खुले आसमान के नीचे भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। सजल का कहना है कि उनके परिवार ने बोकारो स्टील प्लांट की नींव रखने के लिए अपनी कीमती जमीन कुर्बान की थी, लेकिन आज उसी प्लांट से जुड़े अस्पताल में उन्हें अपनी आजीविका के लिए यह कदम उठाना पड़ रहा है। हालांकि, नौकरी से हटाए जाने और श्रमायुक्त के आदेश का पालन न करने के आरोपों पर फिलहाल सेल प्रबंधन और आउटसोर्सिंग कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।


