
Jharkhand High Court: शराब की कथित अवैध ढुलाई के मामले में जब्त एक वाहन को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने बेहद अहम टिप्पणी की है। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि ‘बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016’ केवल बिहार राज्य का कानून है और इसे झारखंड में लागू नहीं किया जा सकता। बोकारो के पिंड्राजोरा थाने से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने वाहन जब्त रखने के निचली अदालतों के फैसलों पर भी सवाल उठाए हैं।

निचली अदालतों ने बिहार के कानून का दिया था हवाला
यह मामला एक कमर्शियल पिकअप वाहन से जुड़ा है, जिसे पुलिस ने अवैध शराब की बोतलों से भरे 145 कार्टन के साथ पकड़ा था। वाहन मालिक रितेश प्रधान ने अपनी गाड़ी छुड़ाने के लिए बोकारो के न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में अर्जी दी थी, जिसे मई 2026 में खारिज कर दिया गया। इसके बाद सत्र न्यायालय ने भी जून 2026 में बिहार के उत्पाद अधिनियम के नियमों का हवाला देते हुए वाहन रिलीज करने से इनकार कर दिया था।

मालिक ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
निचली अदालतों से राहत न मिलने पर वाहन मालिक ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में कहा गया कि वाहन को लेकर असल में अब तक कोई आधिकारिक जब्ती प्रक्रिया (कन्फिस्केशन) शुरू ही नहीं हुई है। इसके अलावा वाहन फाइनेंस पर लिया गया है और थाने में लंबे समय तक खड़े रहने से उसके खराब होने का खतरा है।
हाईकोर्ट ने दिए वाहन रिलीज करने के निर्देश
न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दूसरे राज्य का कानून झारखंड में लागू नहीं होता। कोर्ट ने बोकारो के न्यायिक दंडाधिकारी को निर्देश दिया कि वे उपायुक्त (DC) से रिपोर्ट मांगकर यह जांचें कि क्या वाहन जब्ती की कानूनी कार्रवाई शुरू हुई है। अगर जब्ती की कोई प्रक्रिया पेंडिंग नहीं है, तो उचित शर्तों के साथ पिकअप वैन (नंबर JH-05-DF-9463) को उसके मालिक को सौंप दिया जाए।
कानूनी प्रक्रिया का पालन होना जरूरी
हाईकोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी कार्रवाई के लिए झारखंड के अपने कानूनों और वैधानिक प्रक्रियाओं का ही पालन करना होगा। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि झारखंड में शराब की अवैध तस्करी पर कार्रवाई नहीं हो सकती, बल्कि कार्रवाई राज्य के अपने नियमानुसार ही की जानी चाहिए।


