
Purnea:बिहार के पूर्णिया जिले के केनगर प्रखंड स्थित चपय गांव से एक हैरान कर देने वाला और बेहद चर्चित मामला सामने आया है। यहां रहने वाली रिया गोस्वामी ने अपने ही घर से महज सौ मीटर की दूरी पर रहने वाले मिलन पासवान के साथ प्रेम विवाह रचा लिया। इस रिश्ते की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मिलन और रिया के भाई के बीच पुरानी और गहरी दोस्ती थी। दोस्त होने के नाते मिलन का रिया के घर लगातार आना जाना रहता था। रिया हर साल रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अपने भाई के साथ-साथ मिलन की कलाई पर भी राखी बांधती थी। हालांकि, वक्त गुजरने के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और भाई बहन जैसा यह रिश्ता कब मोहब्बत में बदल गया, किसी को पता ही नहीं चला।

पंचायत और पुलिस का दबाव भी नहीं डिगा सका इरादा
जब दोनों के प्रेम प्रसंग की भनक रिया के परिजनों को लगी तो घर और समाज में बवंडर मच गया। विवाद इतना बढ़ा कि गांव में पंचायत बुलाई गई और मामला थाने तक जा पहुंचा। पुलिस और समाज के तमाम बंधनों और दबावों के बावजूद रिया अपने फैसले से टस से मस नहीं हुई। उसने साफ कर दिया कि वह अपनी पूरी जिंदगी मिलन के साथ ही बिताएगी। जहां बेटी के इस कदम से नाराज मायके वालों ने हमेशा के लिए उससे सारे नाते तोड़ लिए, वहीं दूसरी ओर मिलन के परिवार ने खुले दिल से रिया का स्वागत किया और उसे बहू के साथ बेटी जैसा पूरा प्यार देने की बात कही।

बुलेट पर सवार होकर मायके के सामने से गुजरी नई नवेली दुल्हन
शादी संपन्न होने के बाद जब मिलन पासवान अपनी पत्नी रिया को बुलेट पर बैठाकर उसके मायके के दरवाजे के ठीक सामने से गुजरा, तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई। यह नजारा देखने के लिए लोग घरों से बाहर निकल आए। एक तरफ जहां मायके वाले बेटी को मरा हुआ मान चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ रिया अपने नए ससुराल में बेहद खुश नजर आ रही है। पिता द्वारा जीते जी पिंड दान किए जाने पर रिया ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि उसे अपने पिता के इस फैसले का रत्ती भर भी अफसोस नहीं है। रिया का कहना है कि अगर घरवाले उसे दो साल और अपने पास रखते तो किसी अनजान से उसकी शादी कर देते, जिससे किसी बेकसूर लड़के की जिंदगी बर्बाद हो जाती, इसलिए उसने अपनी पसंद से शादी का फैसला किया।
जीवित बेटी का पुतला बनाकर सजाई अर्थी और श्मशान में दी मुखाग्नि
बेटी के इस अंतरजातीय विवाह से तिलमिलाए पिता ने गुस्से की सारी हदें पार कर दीं। पिता ने अपनी जीवित बेटी को मरा हुआ घोषित कर उसका अंतिम संस्कार करने की ठान ली। पिता ने खुद अपने हाथों से बेटी का पुतला तैयार किया, उसकी विधिवत अर्थी सजाई और पूरे गांव में बाकायदा शवयात्रा निकाली गई। इस शवयात्रा में कई ग्रामीण भी शामिल हुए और फिर श्मशान घाट ले जाकर पुतले को मुखाग्नि दे दी गई। मंगलवार को केनगर के चपय गांव में जीवित बेटी की धू धू कर जली इस चिता से उठी सवालों की चिंगारी अब पूरे इलाके में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है।


