
Khunti: खूंटी के मुरहू प्रखंड के चर्चित आध्यात्मिक योगी और राम मंदिर आंदोलन के कारसेवक मनु साव का बुधवार तड़के सदर अस्पताल, खूंटी में निधन हो गया। वे लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही मुरहू सहित पूरे खूंटी जिले में शोक का माहौल हो गया।

धर्म और योग के लिए समर्पित रहा जीवन
मनु साव लंबे समय से पूजा-पाठ, योग और अध्यात्म से जुड़े रहे। इलाके के कई धार्मिक स्थलों और मंदिरों के प्रचार-प्रसार में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। इनमें मां नकटी देवी सोनपुर गढ़ तोरपा, महादेव टोला, ग्यारह महादेव बम्हनी और गाडू शरमाली बुरजू मोड़ समेत कई स्थान शामिल हैं।

सादगी से जीवन जीने वाले मनु साव धार्मिक गतिविधियों के साथ समाजसेवा में भी जुड़े रहे। वे युवाओं को योग, राम नाम और सनातन संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित करते थे।
राम मंदिर आंदोलन में रहे थे कारसेवक
अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान मनु साव ने कारसेवक के रूप में हिस्सा लिया था। क्षेत्र के लोग उनके इस जुड़ाव को आज भी याद करते हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता के कारण मुरहू क्षेत्र में उनकी अलग पहचान बनी थी।
श्रद्धालुओं से गुलजार रहता था घर
समाजसेवी डॉ. धर्मेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि मनु साव का घर हमेशा श्रद्धालुओं और अध्यात्म में रुचि रखने वाले लोगों से भरा रहता था। उनके निधन से मुरहू के धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में एक खालीपन पैदा हुआ है।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने जताया शोक
मनु साव के निधन पर पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा समेत कई जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शोक जताया।
शोक जताने वालों में काशीनाथ महतो, अरुण साबू, ज्योति डोडराय, डॉ. दीपक कुमार घोष, अर्जुन साव, रामा साव, सुरेश प्रसाद, हरिद्वार ठाकुर, रामहरि साव, सुबोध कुमार, संजय सत्संगी, सूरजमल प्रसाद, बिहारी साव और अधिवक्ता राखोहरि चौधरी समेत कई लोग शामिल रहे।
लोगों ने कहा कि मनु साव ने धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया। उनके निधन से समाज ने एक समर्पित धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्तित्व खो दिया है। लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी में हिम्मत देने की प्रार्थना की।


